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'नो सिक लीव, 15 मिनट का लंच..; अजीबोगरीब नियम के आगे ₹17 लाख रुपये की नौकरी ठुकराई, Video Viral

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Apr 16, 2026 01:25 pm IST,  Updated : Apr 16, 2026 01:25 pm IST

Viral Video : सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी चर्चा में आ गई है। इसमें IIT दिल्ली के ग्रेजुएट ने 17 लाख रुपये की नौकरी को अजब-गजब नियम के आगे ठुकरा दिया।

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शख्स ने ठुकराया जॉब ऑफर। Image Source : IG/@YOURBANKERCHIRAG

Viral Video : IIT दिल्ली के 24 वर्षीय ग्रेजुएट चिराग मदान ने 17 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली कॉर्पोरेट बैंकिंग जॉब को ठुकरा दिया। टॉक्सिक वर्क कल्चर, बीमारी की छुट्टी न मिलना और मात्र 10-15 मिनट का लंच ब्रेक जैसे मुद्दों को लेकर उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। उनके इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपनी इस फैसले की वजह बताई है। 

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @yourbankerchirag नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें चिराग मदान ने बताया कि उनकी जॉब 9 से 5 की बजाय 9 से 7 बजे तक की हो गई थी। हफ्ते में छह दिन काम करना पड़ता था। लंच ब्रेक सिर्फ 10-15 मिनट का मिलता था, जिसमें खाना भी मुश्किल से पूरा होता। बीमार होने पर सिक लीव नहीं मिलती थी—छुट्टी लेने के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण देना पड़ता। इसके अलावा 10 करोड़ रुपये के डील क्लोज करने जैसे आक्रामक सेल्स टारगेट थे, जिससे वर्क प्रेशर बहुत बढ़ गया था। उन्होंने इसे 70 घंटे के वर्क वीक और मेंटल हेल्थ पर असर बताया।

मेंटल हेल्थ को दी प्राथमिकता 

IIT दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई करने के बाद भी उन्होंने सैलरी से ज्यादा अपनी मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता दी। यह घटना कॉर्पोरेट जगत में बढ़ती टॉक्सिक कल्चर की ओर इशारा करती है।  अपने अनुभव का विवरण देते हुए वीडियो में उन्होंने बताया कि "नौकरी छोड़ने का निर्णय आवेगपूर्ण नहीं था, बल्कि बढ़ते काम के दबाव के कारण लिया गया था।"

 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया 

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने चिराग का समर्थन किया। एक यूजर ने लिखा कि, 'मैं पूरी तरह सहमत हूं, मैंने भी 23 साल की उम्र में बैंक की नौकरी छोड़ दी थी और अब मैं दूसरी कंपनी में बैकएंड रोल पर काम कर रहा हूं, जहां का माहौल भी खराब है, लेकिन कम से कम मुझे गलत बिक्री नहीं करनी पड़ती।' दूसरे यूजर ने कहा, 'मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं, मैंने भी कुछ महीने पहले अपनी नौकरी छोड़ दी थी और कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली गलत बिक्री बहुत ज्यादा है। वे ग्राहकों की कमाई के बारे में सोचते तक नहीं हैं, जिसके लिए वे इतनी मेहनत करते हैं। यहां तक ​​कि ग्राहकों को भी पूरी जानकारी नहीं होती कि उन्होंने क्या खरीदा है और उनके निवेश का क्या हो रहा है। आज बैंकिंग की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है और सबसे ज्यादा खराब महीना मार्च का अंत होता है, जब गलत बिक्री चरम पर होती है।' 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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