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पुराने ₹10 के नोट पर हाथी और गैंडा क्यों बना होता था, काफी कम लोग जानते हैं; क्या आपको पता है

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Sep 19, 2026 10:16 am IST,  Updated : Sep 19, 2026 10:17 am IST

आपने भारतीय करेंसी यानी नोटों पर अलग-अलग चिह्न देखे होंगे। मगर क्या आपको पता है कि, पुराने ₹10 के नोट पर हाथी और गैंडे क्यों बने होते थे ?

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10 रुपये का पुराना नोट। Image Source : RBI.ORG.IN

जब भी आप कभी किसी को भारतीय रुपये का भुगतान करते हैं तो क्या आपने उस नोट पर गौर किया है? आमतौर पर भुगतान करने वाला नोट की दशा और प्राप्त करने वाला उसके असली या नकली होने की जांच करता है। मगर नोट पर छपी चीजों पर काफी कम लोगों का ही ध्यान जाता है। यदि आपने 10 रुपये के पुराने नोट का प्रिंट देखा होगा तो आपने उसमें छपे हाथी, गैंडे और बाघ को भी देखा होगा। बाघ के राष्ट्रीय पशु होने की जानकारी होने के अलावा ज्यादातर लोग नोट पर छपे हाथी और गैंडे के मर्म को नहीं समझ पाते हैं। अगर आपको भी नहीं पता है कि, पुराने ₹10 के नोट पर हाथी और गैंडे क्यों बने होते थे? तो आज हम आपको इसके बारे में बता ही देते हैं। 

नोट पर हाथी क्यों बनाया गया

हाथी को भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु (National Heritage Animal) माना जाता है। इसे सांस्कृतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि हिन्दू धर्म में ​हाथी को आर्थिक संपन्नता और समृद्धता का प्रतीक भी माना जाता है। वहीं, पारिस्थितकीय दृष्टि से हाथी जंगहों में संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। वे पेड़ों के बीज फैलाते हैं और जंगलों की संरचना को प्रभावित करते हैं। नोट पर हाथी को शामिल करके देश की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दोनों विरासतों को सम्मान दिया गया। 

नोट पर गैंडा क्यों बनाया गया

10 रुपये के पुराने नोट पर दिखाया जाने वाला एक सींग का गैंडा मुख्यत: असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का प्रतीक है। काजीरंगा एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी संख्या के लिए विश्वप्रसिद्ध है। हालांकि, यह प्रजाति लुप्तप्राय है और भारत के संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। गैंडे के चित्र के नोट पर शामिल करके रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने पूर्वोत्तर भारत की वन्य संपदा और संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। 

नोट पर हाथी, गैंडे और बाघ को बनाने का उद्देश्य 

आपको बता दें कि, नोट पर बनी ये डिज़ाइन केवल सजावट के लिए नहीं बनाई गई थी। दरअसल, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने इसको भारत की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए चुना था। 10 रुपये के पुराने नोट पर हाथी, गैंडे और बाघ को साथ दिखाने के पीछे एक खास उद्देश्य भी था। ऐसा माना गया कि, इससे देश की वन्य संपदा का संदेश प्रत्येक आम नागरिक तक पहुंचेगा। 

आज के नोट में क्या

2019 में भारतीय नोटों की नई सीरीज आने के साथ ही इसका स्वरूप बदल गया। 10 रुपये के नए नोट का कलर चॉकलेट ब्राउन रंग तय किया गया। इसके पीछे ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर का चक्र बनाया गया। ये बदलाव सांस्कृतिक विरासत को प्राथमिकता देने का संकेत होता था। हालांकि, 10 रुपये के पुराने नोट अब भी वैध मुद्रा हैं जिसकी वजह से बाजार में दिखते रहते हैं। बता दें कि, एक समय दस रुपये के नोट के पीछे दो हाथियों की आकृति छपी होती थी। आजादी के बाद भी भारतीय करेंसी पर वन्यजीवों को स्थान मिलता रहा जो कि भारत की प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है।

गौरतलब है कि, इस सवाल के साथ एक सवाल और भी काफी वायरल होता है और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछा जाता है कि किस देश सबसे पहले प्लास्टिक के करेंसी नोट छापना शुरू किया?
 
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