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मथुरा में 90 साल की सास को सिर पर बैठाकर बहू करवा रही बृज की चौरासी कोस की परिक्रमा, देखें VIDEO

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Jun 03, 2026 06:06 pm IST,  Updated : Jun 03, 2026 06:06 pm IST

हरियाणा की एक बहू, अपनी 90 साल की सास को सिर पर बैठाकर मथुरा में 84 कोस की बृज की परिक्रमा करवा रही है। इस बहू की हर तरफ तारीफ हो रही है।

Mathura- India TV Hindi
सास को सिर पर बैठाकर परिक्रमा कर रही बहू Image Source : REPORTER INPUT

मथुरा: हरियाणा की एक बहू ने कलयुग में मिसाल कायम कर दी है। बहू ने मथुरा में अपनी 90 साल की सास को सिर पर लोहे कि परात में बैठाकर 84 कोस ब्रज की परिक्रमा शुरू की है। जहां आधुनिक दौर में रिश्तों में दूरियां बढ़ने की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, वहीं कृष्ण नगरी मथुरा से सास-बहू के अटूट प्रेम, सेवा और समर्पण की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। हरियाणा की एक बहू अपनी 90 वर्षीय सास की वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी करने के लिए उन्हें सिर पर बैठाकर ब्रज की 84 कोस परिक्रमा करा रही है।

काजल चौधरी की जमकर हो रही तारीफ

हरियाणा के पलवल जनपद के हताना गांव निवासी हरियाणवी लोकगायिका काजल चौधरी अपनी वृद्ध सास चन्द्री देवी को एक तसले में बैठाकर लगभग 252 किलोमीटर लंबी ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा कर रही हैं। उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी चन्द्री देवी चलने-फिरने में असमर्थ हैं, लेकिन उनके मन में वर्षों से ब्रज परिक्रमा करने की गहरी इच्छा थी। जब स्वास्थ्य ने उनका साथ छोड़ दिया, तब बहू काजल ने उनकी इस मनोकामना को अपना संकल्प बना लिया।

90 साल की सास को सिर पर लोहे कि परात में बैठाकर बहू ने 84 कोस ब्रज की परिक्रमा शुरू की है। ये परिक्रमा लगभग 252 किलोमीटर लंबी है।

परिक्रमा मार्ग पर काजल चौधरी अपनी सास को सिर पर उठाकर गांव-गांव, तीर्थ-तीर्थ और धाम-धाम तक ले जा रही हैं। भीषण गर्मी, उमस और लंबी दूरी भी उनके हौसले को कम नहीं कर पा रही। उनकी यह सेवा और समर्पण देख श्रद्धालु तथा स्थानीय लोग भावुक हो उठते हैं और सास-बहू के इस रिश्ते की खुलकर सराहना कर रहे हैं।

बहू ने क्या बताया?

बहू काजल चौधरी का कहना है कि उनकी सास उनके लिए मां के समान हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें स्नेह और सम्मान दिया है। ऐसे में यदि उनकी कोई इच्छा अधूरी रह जाए, तो उसे पूरा करना उनका कर्तव्य है। इसी भावना के साथ वह पूरी श्रद्धा और निष्ठा से परिक्रमा कर रही हैं।

वहीं तसले में बैठी चन्द्री देवी के चेहरे पर संतोष, श्रद्धा और आनंद की झलक साफ दिखाई देती है। उनकी आंखों में उस सपने के साकार होने की खुशी है, जिसे उन्होंने शायद उम्र और स्वास्थ्य की मजबूरियों के कारण अधूरा मान लिया था। ब्रजभूमि में इन दिनों यह अनूठी परिक्रमा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों की जीवंत मिसाल के रूप में देख रहे हैं। सास-बहू के रिश्ते की यह प्रेरणादायक कहानी समाज को यह संदेश दे रही है कि प्रेम, सम्मान और समर्पण से हर असंभव कार्य संभव बनाया जा सकता है। (रिपोर्ट- मथुरा से मोहन श्याम शर्मा)

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