आपको देश में ऐसा कोई इंसान नहीं मिलेगा जिसे पैसे के बारे में पता नहीं होगा। यहां तक कि छोटे बच्चे भी अब जानते हैं कि कोई चीज खरीदने के लिए पैसा चाहिए और भले ही कुछ भी फेंक देंगे, मगर पैसा कभी नहीं फेंकते हैं। कुल मिलाकर बात यह है कि पैसा हर इंसान के लिए जरूरी होता है और आप भी बस इसी चीज की वजह से नौकरी कर रहे होंगे। लेकिन सुबह से लेकर शाम तक हमारी जेब में जो पैसे नोट और सिक्कों के रूप में पड़े रहते हैं, उन्हीं से जुड़ी कॉमन जानकारी हमें नहीं होती है और जब कोई उस टॉपिक को छेड़ता है तो हर कोई हैरान हो जाता है कि अरे हां यार, मैंने तो ऐसा सोचा ही नहीं। आज हम आपको कुछ ऐसा ही बताने वाले हैं।
पहले एक काम कीजिए
आप एक काम कीजिए। आप अपनी जेब में से अपना पर्स निकालिए और देखिए कि उसमें कौन-कौन से नोट हैं। आपके पर्स में 10 रुपए से लेकर 500 रुपए तक का कोई सा भी नोट हो सकता है या फिर सभी नोट एक-एक होंगे। लेकिन क्या आपके पर्स में ज़ीरो रुपए का नोट है? अरे आप तो हैरान हो गए। आप यही कह रहे होंगे कि ज़ीरो रुपए का नोट होता ही नहीं है। कोई ज़ीरो रुपए का नोट क्यों ही छापेगा और कोई क्यों ही रखेगा। मगर आपको बता दें कि ऐसा नहीं है। एक समय था जब देश में ज़ीरो रुपए का नोट छपा था। आइए आपको बताते हैं कि ऐसा किसने किया था और क्यों किया गया था।
कब छपे थे ज़ीरो रुपए के नोट?
आपको बता दें कि वो साल था 2007 का जब ज़ीरो रुपए का नोट छापा गया। यह नोट रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने नहीं बल्कि एक NGO ने छापा था। दरअसल उस NGO का नाम 'Fifth Piller' था जो तमिलनाडु के चेन्नई में था। उस NGO ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक मुहिम शुरू की थी और उसी मुहिम के तहत यह ज़ीरो रुपए के नोट छापे गए थे। इसके पीछे का कारण यह था कि अगर कोई अधिकारी रिश्वत मांगे तो उसे यह ज़ीरो रुपए का नोट दिया जाए। इसी कारण एनजीओ के लोगों ने कई जगहों पर लोगों को यह नोट बांटे भी थे और उन्हें जागरूक भी किया था।
कैसा दिखता था यह ज़ीरो रुपए का नोट?
आपने पुराने वाले नोट देखे और यूज तो किए ही होंगे। ऐसा है तो फिर आपने पुराना वाला 50 रुपए का नोट भी देखा होगा। बता दें कि ज़ीरो रुपए का नोट बिल्कुल उसी तरह दिखता था मगर इसमें कुछ बदलाव भी था। इस नोट पर ज़ीरो रुपए लिखा होता था और ऊपर भ्रष्टाचार खत्म करो भी लिखा होता था। वहीं नोट के एक कोने में '5TH Piller' लिखा होता था। नॉर्मल नोट में 'मैं धारक को....' वाली लाइन लिखी होती है तो वहीं ज़ीरो रुपए वाले नोट में 'न लेने की, न देने की कसम खाते हैं' लिखा होता है।

नोट: इस आर्टिकल में दी गई सारी जानकारी अलग-अलग रिपोर्ट्स पर आधारित है और इंडिया टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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