हमारे देश में आपको तीन तरह के लोग देखने को मिलेंगे। एक वो होते हैं जो पूरी तरह से शाकाहारी होते हैं। दूसरे वो होते हैं जो नॉन-वेज खाते हैं। वहीं तीसरा प्रकार वो होता है जो खुद को शाकाहारी बोलता है लेकिन साथ में यह भी बोलता है कि वो बस अंडा खा लेते हैं। इसी कारण वो खुद को एगिटेरियन बोलते हैं। आपने भी ऐसे किसी न किसी इंसान को देखा होगा या फिर आपके ग्रुप में भी कोई ऐसा जरूर ही होगा। अब जब बात अंडे की छिड़ी है तो फिर हम आपको अंडे से जुड़ी ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं, जो आपको पता ही नहीं होगी और जवाब जानकर आप पूरी तरह से हैरान हो जाएंगे।
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अंडे अलग-अलग रंग के क्यों होते हैं?
आप अगर अंडा खाते हैं तो फिर यह जानते होंगे कि अंडा वाला दो तरह के अंडे बेचता है। एक नॉर्मल अंडा होता है तो वहीं दूसरा देसी अंडा होता है। आपने देखा होगा कि दोनों का रंग अलग-अलग होता है। एक अंडा जो नॉर्मल होता है, उसकी परत सफेद रंग की होती है तो वहीं देसी अंडे की परत भूरे रंग की होती है। तो क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि अंडे अलग-अलग रंग के क्यों होते हैं। आइए हम आपको इसके बारे में बताते हैं।

आपको बता दें कि अंडे का रंग कैसा होगा, यह ज्यादातर मुर्गियों के जेनेटिक्स से तय होता है। आप अगर मुर्गी को देखकर यह अंदाजा लगाना चाहते हैं कि वो मुर्गी किस रंग के अंडे देगी, इसका एक अच्छा तरीका उसके इयरलोब को देखना है। जिन मुर्गियों के इयरलोब सफेद होते हैं, वे सफेद अंडे देती हैं। लेकिन सभी अंडे शुरू में सफेद होते हैं क्योंकि उनके शेल कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं। अंडे बनने के साथ ही उन्हें मुर्गी के जेनेटिक्स से अपना रंग मिलता है। कई बार ऐसा भी होता है कि हल्के इयरलोब वाली मुर्गियों के पंख भी सफ़ेद होते हैं और वे सफ़ेद अंडे देती हैं। जिनके पंख गहरे रंग के होते हैं और इयरलोब गहरे रंग के होते हैं, वे ज्यादा रंगीन अंडे देंगी। वैसे यह रंग सिर्फ अंडे को छिल्कों पर देखने को मिलता है। अंदर से सभी अंडे आपको सफेद ही देखने को मिलेंगे।
नोट: इस आर्टिकल में दी गई सारी जानकारी अलग-अलग रिपोर्ट्स पर आधारित है और इंडिया टीवी इनकी पुष्टि नहीं करता है।
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