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ट्रेन के पहिए किस धातु से बनते हैं? लोहा सोच रहे हैं तो बिल्कुल गलत हैं आप

 Written By: Adarsh Pandey
 Published : Feb 11, 2026 10:21 pm IST,  Updated : Feb 11, 2026 10:22 pm IST

Interesting Facts: आपने कभी न कभी ट्रेन में सफर तो किया ही होगा, तो फिर बताइए कि ट्रेन के पहिए किस धातु से बनते हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि लोहे से बनते हैं तो फिर यह गलत जवाब है। हम आपको बताते हैं कि ट्रेन के पहिए किससे बनते हैं।

Train's Wheel- India TV Hindi
ट्रेन के पहियों की फोटो Image Source : PEXELS

ट्रेन सफर करने का एक ऐसा साधन है जिसका भारत में खूब इस्तेमाल होता है। मिडल क्लास और लोअर क्लास के लोग तो ट्रेन का ही सबसे ज्यादा यूज करते हैं क्योंकि ट्रेन का टिकट उनके बजट में आ जाता है। वहीं अपर मिडल क्लास के लोग भी आपको ट्रेन में सफर करते हुए नजर आ जाएंगे, वो भले ही फर्स्ट एसी में सफर करते होंगे मगर ट्रेन से सफर जरूर करते हैं। वहीं कई सारे लोग दूर के सफर में ट्रेन को ही चुनते हैं क्योंकि यह बहुत ही आरामदायक रहता है। आप भी ट्रेन में खूब सफर करते होंगे। आज हम आपको ट्रेन के बारे में एक ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं, जो आपने अब तक न सुना होगा और कई लोगों ने तो इसके बारे में सोचा भी नहीं होगा।

ट्रेन का पहिया किस धातु से बनता है?

आप सभी ने ट्रेन में न जानें कितनी बार सफर किया होगा। इसके अलावा ट्रेन कई बार गुजरते हुए भी नजर आती है। कुल मिलाकर बात यह है कि आपने ट्रेन को कई बार देखा होगा लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि ट्रेन के जो पहिए होते हैं, वो किस धातु से बनते हैं। आप अगर यह सोच रहे हैं कि ट्रेन के पहिए तो लोहा से ही बनते होंगे तो फिर आप पूरी तरह से गलत है। आपको बता दें कि ट्रेन के पहिए मुख्य रूप से फोर्ज्ड स्टील या फिर कार्बन स्टील मिक्स धातु से बनाए जाते हैं। ये पहिए बहुत ही मजबूत, उच्च दबाव और भारी वजन को सहने के लिए बनाया जाता है। इन पहियों को बनाने के लिए भारी स्टील को उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है और फोर्जिंग प्रोसेस से पहिए बनाए जाते हैं।

Train's Wheel
Image Source : PEXELSट्रेन के पहिए

पहली बार तीन इंजन से चली थी ट्रेन

भारत में 16 अप्रैल 1853 को जब ट्रेन की शुरुआत हुई थी तब 13 डिब्बों के ट्रेन को चलाने के लिए तीन इंजन लगे थे। आपको बता दें कि उन तीनों इंजन के नाम साहिब, सिंध और सुल्तान थे और दोपहर करीब 3 बजकर 30 मिनट पर देश की पहली ट्रेन को बोरीबंदर से चलाया गया था। उस ट्रेन ने 1 घंटा 15 मिनट में कुल 34 किमी का सफर तक करते हुए ठाणे पहुंची थी और उस यात्रा में 400 लोगों को सफर करने का मौका मिला था।

चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है रेल

आपको बता दें कि भारतीय रेल जिसकी शुरुआत साल 1853 में हुई थी, वो आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क बन चुका है। भारत में आज वंदे भारत, तेजस एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन हैं। इसके अलावा नॉर्मल ट्रेनें तो हैं ही।

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