वॉशिंगटन: अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच संभावित युद्धविराम वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाना 'समस्याग्रस्त' है, क्योंकि इजरायल के प्रति उसका रवैया लंबे समय से विरोधी रहा है। सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पाकिस्तान की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के एयरबेस पर रखे जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के इजरायल विरोधी बयान भी चिंता पैदा करते हैं।
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'पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाना बेहद विवादित फैसला'
ग्राहम ने लिखा, 'काफी समय से मुझे लग रहा है कि पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाना बेहद विवादित फैसला है। इजरायल के प्रति उसकी दुश्मनी पुरानी है। यह भी साफ है कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के एयरबेस पर मौजूद हैं और पाकिस्तान के बड़े नेताओं के इजरायल विरोधी बयान परेशान करने वाले हैं।' यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पहल को खारिज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान से अब्राहम समझौते में शामिल होने की बात कही गई थी।
'इस मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख बिल्कुल साफ'
पाकिस्तानी टीवी चैनल समा टीवी को दिए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, 'मेरी निजी राय में पाकिस्तान को किसी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बनना चाहिए जो हमारी बुनियादी विचारधारा के खिलाफ हो।' उन्होंने इजरायल पर भरोसा न करने की बात भी कही। आसिफ ने कहा, 'आप उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख बिल्कुल साफ है और यह हमारे लिए स्वीकार्य नहीं है।'
ख्वाजा आसिफ के बयानों पर भड़के लिंडसे ग्राहम
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने देश की पासपोर्ट नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान दुनिया का शायद इकलौता देश है जिसके पासपोर्ट पर इजरायल का नाम तक नहीं लिखा जाता।' सीनेटर ग्राहम ने ख्वाजा आसिफ के इन बयानों को 'चिंताजनक' बताया और कहा कि भले ही यह वीडियो पुराना हो, लेकिन पाकिस्तान की सोच आज भी वही लगती है। उन्होंने पाकिस्तान से मांग की कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के अब्राहम समझौते में शामिल होने के प्रस्ताव पर तुरंत अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करे।
'ईरान के साथ बातचीत अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही'
दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप हाल ही में कई मुस्लिम और अरब देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ संभावित समझौते के बाद मध्य पूर्व में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लंबा संदेश लिखते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत 'अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही है।' उन्होंने कहा कि यह समझौता मध्य पूर्व के लिए 'ऐतिहासिक घटना' साबित हो सकता है।
'अगर समझौता नहीं हुआ तो हो सकती है बड़ी लड़ाई'
ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, इजिप्ट, जॉर्डन और बहरीन जैसे देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो क्षेत्र में संघर्ष और ज्यादा बड़ा और खतरनाक हो सकता है। बता दें कि अब्राहम समझौता 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ एक बड़ा समझौता था, जिसके तहत इजरायल और कई अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध सामान्य किए गए थे।