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ईरान के साथ समझौते के बाद डोनाल्ड ट्रंप का नया मिशन, जानें मुस्लिम देशों से क्या मांग कर दी

 Edited By: Adarsh Pandey
 Published : May 25, 2026 02:54 pm IST,  Updated : May 25, 2026 02:54 pm IST

अभी अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की चर्चा तो है ही, मगर उसी के बीच अब्राहम अकॉर्ड की विस्तार को लेकर भी चर्चा होने लगी है। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि ईरान के साथ समझौता होने के बाद अब्राहम अकॉर्ड का विस्तार किया जाए।

US President Donald Trump- India TV Hindi
US President Donald Trump Image Source : AP

अमेरिका और ईरान के बीच में जारी तनाव को लेकर समझौता होने की बात चल रही है। इसी बीच एक नई खबर भी सामने आ रही है। आपको बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह चाहते हैं कि ईरान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद और इस युद्ध के खत्म होने के बाद 'अब्राहम अकॉर्ड्स' का विस्तार किया जाए। ट्रंप चाहते हैं कि समझौता होने के बाद मुस्लिम देश अब्राहम अकॉर्ड का विस्तार करते हुए इजरायल को मान्यता दें। इस संबंध में एक्सियोस ने अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत करते हुए एक रिपोर्ट में कहा है कि ट्रंप ने बीते शनिवार को इस मामले में अरब और दूसरे मुस्लिम देशों के नेताओं से बात भी की है।

ट्रंप की क्या बातचीत हुई?

ईरान के साथ समझौता होने के बाद अब्राहम अकॉर्ड्स को लेकर बातचीत करने और उसका विस्तार करने के संबंद में ट्रंप ने बीते शनिवार को सऊदी अरब, UAE, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्त्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं के साथ फोन पर बात की और उस फोन कॉल पर ईरान और इजरायल को लेकर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक फोन कॉल करने के पीछे ट्रंप का मुख्य उद्देश्य सऊदी-इजरायल के बीच समझौता कराना है।

आपको बता दें कि उसी कॉल पर ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं से कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के बाद सभी मुस्लिम देश इजरायल के साथ अपने संबंधों को ठीक करने की पहल को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि इस पहल को लेकर मुस्लिम देशों ने अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आखिर क्या है अब्राहम अकॉर्ड?

आपको बता दें कि अब्राहम अकॉर्ड साल 2020 में हुआ एक अहम प्रोजेक्ट रहा है। इसका उद्देश्य अमेरिकी की मध्यस्ता में इजरायल को पश्चिम एशिया में मान्यता दिलाना है। इसके साथ ही अरब देशों के साथ इजरायल के संबंधों को अच्छा करना है। आपको बता दें कि इस प्रोजेक्ट में UAE और बहरीन सबसे पहले जुड़े थे।

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