एक ट्रेन यात्री द्वारा रात भर की असुविधाजनक यात्रा का वर्णन करने के बाद, सिविक सेंस, सार्वजनिक व्यवहार और ऐसे मुद्दों पर अजनबियों से भिड़ना उचित है या नहीं, इस बारे में ऑनलाइन चर्चा छिड़ गई है। यात्री ने ट्रेन के एक डिब्बे के अंदर से एक तस्वीर शेयर की, जिसमें सीटों के पास फर्श पर खाने के रैपर, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा बिखरा हुआ दिखाई दे रहा था। तस्वीर के साथ, उन्होंने यह भी बताया
एक्स पर बताया पूरा मामला
इस पोस्ट को एक्स पर @aaraynsh नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस पोस्ट में यूजर ने दावा किया कि, उसके बगल में बैठा यात्री लगभग पूरी आठ घंटे की यात्रा के दौरान खाने में ही लगा रहा और बचे हुए खाने को पास के कूड़ेदान में फेंकने के बजाय सीट के नीचे फेंकता रहा। उन्होंने लिखा, 'मेरी सीट के बगल में बैठे यात्री ने पूरी 8 घंटे की ट्रेन यात्रा के दौरान खाना खाया और बचा हुआ सारा खाना सीट के नीचे फेंक दिया। कूड़ेदान ठीक बाहर था। बाद में, जब सभी सोने की कोशिश कर रहे थे, तो उसने तेज़ आवाज़ में वीडियो चलाना शुरू कर दिया।' उस पोस्ट में एक तस्वीर भी शामिल थी जिसमें ट्रेन के फर्श पर कई खाली पानी की बोतलें, खाने के पैकेट और अन्य कचरा पड़ा हुआ दिखाई दे रहा था, जबकि यात्री पास ही बैठे थे। यूजर ने बताया कि शुरुआत में वह बोलना चाहता था और उस व्यक्ति से जिम्मेदारी से व्यवहार करने के लिए कहना चाहता था। हालांकि, उसने अंततः ऐसा न करने का फैसला किया क्योंकि उसे डर था कि स्थिति और बिगड़ सकती है।
'ऐसे लोग कभी भी हिंसा शुरू कर देंगे'
यात्री ने कहा कि किसी अजनबी को सबक सिखाने से ज़्यादा ज़रूरी उसकी निजी सुरक्षा है। उन्होंने लिखा, 'मैं उसे नागरिकता का पाठ पढ़ाना चाहता था, लेकिन मैंने खुद को रोक लिया क्योंकि किसी अनजान व्यक्ति को नैतिकता सिखाने से ज्यादा जरूरी है कि मैं सुरक्षित घर पहुंच जाऊं। मेरा परिवार है, लक्ष्य हैं और भविष्य के लिए योजनाएं हैं। आपको व्यावहारिक होना चाहिए। ऐसे व्यवहार को लेकर लोगों से सीधे बात करने से अक्सर बदलाव नहीं आता और कभी-कभी तो बहस या हिंसा भी हो सकती है। आप पूरे देश को नहीं बदल सकते। अगर आप इन लोगों से बात करेंगे, तो वे सीखेंगे नहीं या अपनी गलती स्वीकार नहीं करेंगे। इसके बजाय, वे झगड़ा शुरू कर देंगे और हिंसा भी कर सकते हैं।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं, जिनमें से कई ने अपने समान अनुभव साझा किए। एक व्यक्ति ने लिखा कि, 'मुझे भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा है। खासकर उत्तर भारतीय ट्रेनों में। मैं उत्तर भारत को दोष नहीं दे रहा हूँ। लेकिन यह एक वास्तविकता है।'
दूसरे ने लिखा कि, 'आप बस इस फोटो को X पर साझा कर सकते थे और रेल सेवा, IRCTC, RPF और रेल मंत्रालय के खातों को टैग कर सकते थे। वे उन लोगों को आसानी से संभाल सकते थे। बात बस इतनी सी है कि संसाधनों का सही समय पर उपयोग करना।'
तीसरे ने लिखा कि, 'बिल्कुल सही। मैं हॉस्टल में रह रहा था और एक बेवकूफ रोज़ाना तीन घंटे तक लगातार अपने फोन का अलार्म बजाता रहता था और सबको परेशान करता था। मैंने उसकी शिकायत मैनेजर से की। ऐसे बेवकूफों से निपटना नहीं चाहता था।'
एक और यूजर ने लिखा कि, 'अगर आप किसी समूह में नहीं हैं तो कुछ भी न करें।'
एक यूजर ने हैरानी जताते हुए लिखा, 'लेकिन उन्होंने वहां क्या किया है?? और आराम से वहां बैठे हैं।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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