Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को और भी मजबूत करने के लिए नित नए कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में ट्रेनों को आज की आवश्यकता के अनुरूप अपग्रेड किया जा रहा है। मगर अब भी कई ट्रेनें ऐसी हैं जिनका डिजाइन और उनकी कोच पोजिशन पुरानी व्यवस्थाओं के अनुरूप ही है। वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत जैसी नई ट्रेनों की बात करें तो इनका डिजाइन पुरानी ट्रेनों की अपेक्षा काफी बदल चुका है या यूं कहें कि ट्रेनों को बिल्कुल बुलेट ट्रेन जैसा आकार दे दिया गया है। पुरानी ट्रेनों के डिजाइन की बात होते ही यात्रियों को उसमें मौजूद कई खामियां नजर आती हैं जिसमें उनको परिवर्तन की गुंजाइश नजर आती है। प्राय: ट्रेन के यात्री ट्रेन के उस हिस्से में टॉयलेट की मांग करते हैं जिसमें टॉयलेट नहीं बना होता है। क्या आपको पता है कि, ट्रेन में एक ऐसा हिस्सा होता है जहां टॉयलेट नहीं बना होता है और उसमें यात्रियों की एंट्री पूरी तरह बैन होती है। आज हम आपको ट्रेन के उसी हिस्से के बारे में बताएंगे।
आधुनिक भारतीय रेलवे के बारे में
ये तो आप जानते ही होंगे कि भारतीय रेलवे अब बतौर विश्व के सबसे बड़े और मॉर्डन रेल नेटवर्क के तौर पर जाना जाने लगा है। इसकी वजह है भारतीय रेलवे द्वारा किए गए कुछ उल्लेखनीय कार्य। इस कड़ी में अमृत भारत ट्रेनों के जरिए गैर-एसी श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करने के बाद, भारतीय रेलवे जल्द ही एसी श्रेणी के यात्रियों के लिए पहली वंदे भारत स्लीपर शुरू कर चुका है। यह ट्रेन लंबी दूरी की रेल यात्रा को सही मायने में नया रूप देगी और यात्रा के समय को काफी कम करेगी। ये पहले व्यस्त मार्गों पर और फिर धीरे-धीरे सभी मार्गों पर शुरू की जाएगी। भारत भर में पुनर्निर्मित स्टेशन यात्रियों को हवाई अड्डे जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं, जिनमें आधुनिक और चौड़े प्रवेश द्वार, उन्नत शौचालय, एस्केलेटर, लिफ्ट, फूड कोर्ट और अत्याधुनिक प्रतीक्षा कक्ष आदि शामिल हैं।

रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार
आपको बता दें कि, रेलवे ने अपने आधुनिक बुनियादी ढांचे में भी काफी सुधार किया है। भारतीय रेलवे बेहतर यात्रा अनुभव, कुशल माल ढुलाई सेवाएं और आधुनिक तकनीक प्रदान करके राष्ट्रीय विकास को गति दे रहा है। जहां एक ओर वर्ष 2025 में सुरक्षित, तेज और आरामदायक रेल यात्रा प्रदान करने की मजबूत नींव रखी गई वहीं, 2026 में भी अभूतपूर्व कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ताकि रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया जा सकता है।
ट्रेन के किस हिस्से में टॉयलेट नहीं होता
यदि आपको नहीं पता है तो आपको बता दें कि, ट्रेन का इंजन इकलौता ऐसा हिस्सा है जहां पर टॉयलेट नहीं होता है। ट्रेन के इंजन में लोको पायलट के बैठने के लिए महज एक सीट होती है। पुरानी ट्रेनों के इंजन में टॉयलेट जगह के अभाव में नहीं बनाए जाते थे क्योंकि ट्रेन का इंजन तकनीकी उपकरणों और कंट्रोल पैनल से परिपूर्ण होता है। ऐसे में सुरक्षा कारणों का ध्यान रखते हुए इंजन में टॉयलेट नहीं बनाया जाता था।

ट्रेन के इंजन में एंट्री पर सजा
कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि, ट्रेनों के इंजन में यात्रियों का प्रवेश पूर्णतया वर्जित होता है। इसके बाद भी अगर कोई पैसेंजर जबरन इंजन में घुसता है तो रेलवे अधिनियत 1989 की धारा 156 के तहत इसे अपराध माना जाएगा। ऐसे में दोषी यात्री को तीन महीने की जेल, 500 रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। बताया जाता है कि, इस कार्रवाई को करने का अधिकार रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और पुलिस के पास होता है। इतना ही नहीं इंजन में जबरन प्रवेश करने पर यात्री को तत्काल प्रभाव से ट्रेन से उतारा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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