Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे आजकल अपनी नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के संचालन को लेकर काफी चर्चा में है। सिर्फ वंदे भारत ही नहीं बल्कि, भारतीय रेलवे ने विकास की दिशा में और भी ऐसे-ऐसे काम किए हैं जिनके बारे में सुनते ही दुनिया के बड़े-बड़े देशों के लोग चौंक जाते हैं। दरअसल, अब तक भारतीय रेलवे कई ऐसे चुनौतीपूर्ण काम कर चुका है जो उसे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में शुमार करते हैं। रेलवे के कई बड़े कामों में से रेलवे स्टेशन का विस्तार भी एक बड़ा काम है। पिछले कुछ सालों में रेलवे बहुत से स्टेशनों की कायाकल्प कर उनको नई पहचान दे चुका है। मगर आज भी कई रेलवे स्टेशन ऐसे हैं जो कि पुराने समय कर याद दिलाते हैं। इनमें से एक ऐसा रेलवे स्टेशन भी है जहां रविवार को ट्रेन का हॉर्न नहीं बजता है। आज हम आपको इसी रेलवे स्टेशन के बारे में बताने वाले हैं।
भारत में आपको बहुत से ऐसे अजब-गजब और नायाब रेलवे स्टेशन मिलेंगे जिनके बारे में आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि वे इतने विचित्र हो सकते हैं। जैसे कि, अब नवापुर रेलवे स्टेशन को ही ले लीजिए इसकी खासियत है कि, ये महाराष्ट्र और गुजरात दोनों में है। इससे इतर भारत में आपको अटारी जैसे रेलवे स्टेशन भी मिल जाएंगे जहां पर जाने के लिए वीजा जरूरी है। वैसे तो भारत में अनोखे रेलवे स्टेशनों के फेहरिस्त काफी लंबी है जिसमें 28 अक्षरों वाला एक रेलवे स्टेशन 'वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा' भी है।

कई बार देखा जाता है कि, रविवार को कुछ ट्रेनें देरी ये आती हैं या वे कैंसल हो जाती हैं। वैसे आपको बता दें कि, रविवार के दिन यात्रा करनी है तो हमेशा अपनी ट्रेन का स्टेटस ऑनलाइन (NTES, RailYatri) चेक करना सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि भारतीय रेलवे हर रविवार को ट्रैक मरम्मत के लिए बड़े ब्लॉक लेता है, जिससे सभी ट्रेनों पर असर पड़ सकता है, हालांकि इसका उद्देश्य बाकी दिनों में सेवा में सुधार करना है।
क्या आपको पता है कि, भारत में एक ऐसा रेलवे स्टेशन है जहां रविवार को ट्रेन का हॉर्न या सीटी नहीं बजती है। जी हां, यह रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के पास स्थित है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्धमान से करीब 35 Km दूर स्थित इस स्टेशन पर केवल बांकुड़ा-मासाग्राम पैसेंजर ट्रेन ही रुकती है, लेकिन रविवार को यह ट्रेन भी नहीं आती और स्टेशन पर पूरी तरह पिन ड्रॉप साइलेंस रहती है यानी न तो ट्रेन का हॉर्न बजता है और न ही कोई अनाउंसमेंट होती है।

गौरतलब है कि, रविवार को स्टेशन मास्टर को ट्रेन के लिए टिकट खरीदने के लिए बर्धमान शहर जाते हैं। यही वजह है कि, स्टेशन पर टिकट काउंटर और सभी सेवाएं उस दिन बंद रहती हें। यहां की एक दिलचप बात ये भी है कि, इस स्टेशन का कोई नाम नहीं है। नाम न होने के बावजूद यह स्टेशन स्थानीय यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बांकुड़ा और मासाग्राम के बीच सफर करने वालों का छोटा, लेकिन आवश्यक पड़ाव है। स्थानीय लोग दावा करते हैं कि, ऐसे छोटे स्टेशन पहले सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बनाए जाते थे ताकि लोगों को ट्रेन सेवा का लाभ मिले। मगर, मॉर्डन समय में बड़े नेटवर्क और ई-टिकट ने इनकी अहमियत बदल दी है हालांकि, इसके बाद भी ये पुराने उन्हीं दिनों कर याद दिलाता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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