शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी छोड़कर पहाड़ों की गोद में बसने का सपना कई लोग देखते हैं, लेकिन कुछ लोग इसे सच भी कर दिखाते हैं। प्रेरणा दलाल की कहानी भी ऐसी ही है। 35 साल की उम्र में कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर बनी प्रेरणा ने लद्दाख के एक छोटे से गांव में होमस्टे में समय बिताया और वहां की सादगी से इतना जुड़ गईं कि लौटने का मन नहीं कर रहा। उनका यह अनुभव सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @forever_a_wildsoul हैंडल से शेयर किया गया है। प्रेरणा ने इंस्टाग्राम पर एक 57 सेकंड का वीडियो शेयर किया। इसमें वे बताती हैं, “मैं दो महीने से लद्दाख में हूं और इनमें से 14 दिन इसी गांव में बिता चुकी हूं। आप सोच रहे होंगे कि इतने कम समय में तो पूरा लद्दाख घूमा जा सकता है, फिर इस गांव में इतने दिन क्यों रुकीं?” वे लेह से करीब 15 किलोमीटर दूर कांगरी पहाड़ों के बीच बसे स्टोक गांव की बात कर रही हैं।
राजा का आखिरी घर
स्टोक गांव लद्दाख के आखिरी राजा का घर होने के लिए जाना जाता है। प्रेरणा कहती हैं कि यहां आने से पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। लेकिन यहां रहने के बाद उन्होंने लद्दाख का वह पहलू देखा जो ज्यादातर पर्यटक मिस कर देते हैं। उन्हें पता चल गया कि सबसे नजदीकी राशन की दुकान कहां है, गांव के आसपास घूमने के सबसे अच्छे रास्ते कौन से हैं और लद्दाखी स्टाइल में मोमोज कैसे बनाए जाते हैं।
होमस्टे का अनुभव
होमस्टे में रहने का अनुभव सिर्फ ठहरने तक सीमित नहीं रहा। प्रेरणा ने होमस्टे होस्ट के साथ चाय पीते हुए बातचीत की, स्थानीय संस्कृति को करीब से जाना और गांव की जिंदगी का हिस्सा बन गईं। वे कहती हैं कि अगर सिर्फ पर्यटन स्थलों को देखकर चली जातीं तो ये सब अनुभव नहीं मिल पाते। यही स्लो ट्रैवल की खूबी है।
कॉर्पोरेट जॉब छोड़कर बनीं कंटेंट क्रिएटर
प्रेरणा ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर जिंदगी को एक अलग नजरिए से समझने का फैसला किया था। अब वे डिजिटल कंटेंट बना रही हैं और यात्राओं के अनुभव साझा कर रही हैं। स्टोक में रहने के बाद वे कहती हैं कि यह जगह अब घर जैसी लगने लगी है। वे अनगिनत कहानियां, परिचित चेहरे और यादें लेकर जा रही हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर हजारों लोगों तक पहुंच चुका है। कई यूजर्स ने इसे सराहा और कहा कि शहर की जिंदगी छोड़कर पहाड़ों में बसने का सपना कई लोगों का है। कुछ ने स्लो ट्रैवल के महत्व पर चर्चा की तो कुछ ने पूछा कि क्या लंबे समय तक वहां रहना व्यावहारिक है।
हर टूरिस्ट को आकर्षित करता है लद्दाख
लद्दाख की सुंदरता और स्थानीय लोगों की सादगी कई यात्रियों को आकर्षित करती है। लेकिन कई लोग दिखाते हैं कि सिर्फ घूमने से ज्यादा वहां की जिंदगी का हिस्सा बनना कितना समृद्ध अनुभव दे सकता है। होमस्टे संस्कृति पर्यटकों को स्थानीय परिवारों से जोड़ती है और दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाती है। ये वायरल वीडियो याद दिलाती है कि कभी-कभी एक छोटी सी यात्रा जिंदगी बदल सकती है। ऑफिस डेस्क से हिमालयन होमस्टे तक का उनका सफर साहस और आत्म-खोज की मिसाल है। चाहे वे वापस शहर लौटें या पहाड़ों में ही बस जाएं, उनका यह अनुभव कई लोगों के दिलों में जगह बना चुका है।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक कपल ने लद्दाख से अपने वर्क वेकेशन का वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने ₹96,600 खर्च कर दिए थे।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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