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TMC पर कब्जे की लड़ाई अब चुनाव आयोग पहुंची, ममता बनर्जी और ऋतब्रत को जवाब देने के लिए 6 जुलाई तक मिला समय

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Jul 02, 2026 11:12 pm IST,  Updated : Jul 02, 2026 11:18 pm IST

तृणमूल कांग्रेस में संगठन पर वर्चस्व की लड़ाई अब चुनाव आयोग तक पहुंच गई है। आयोग ने पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी को अलग-अलग चिट्ठी भेजी है। चुनाव आयोग ने दोनों नेताओं को सोमवार, 6 जुलाई 2026 को शाम साढ़े पांच बजे तक अपना पक्ष रखने का समय दिया है।

ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी- India TV Hindi
ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी। फाइल Image Source : ANI

नई दिल्लीः तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर कब्जे की लड़ाई अब चुनाव आयोग पहुंच गई है। आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी को अलग-अलग चिट्ठी भेजी है। ये चिट्ठी पार्टी के संगठनात्मक चुनाव और आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के अधिकार को लेकर दोनों गुटों के दावों के बाद लिखी गई है। चुनाव आयोग ने दोनों नेताओं को सोमवार, 6 जुलाई 2026 को शाम साढ़े पांच बजे तक अपना पक्ष रखने का समय दिया है।

 ऋतब्रत बनर्जी ने की चुनाव आयोग से मुलाकात

जानकारी के अनुसार, बंगाल विधानसभा में लीडर ऑफ अपोजिशन ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में पार्टी के नेताओं के एक डेलीगेशन ने इलेक्शन कमीशन की फुल बेंच से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि पार्टी के ज्यादातर विधायक, पार्षद और कार्यकर्ता उनके साथ हैं। इसलिए असली तृणमूल कांग्रेस उन्हीं का गुट है। उन्हें पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मिलना चाहिए। ऋतब्रत ने इलेक्शन कमीशन को बताया कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक बदलाव किए गए हैं। 22 जून को कोलकाता में हुए प्रतिनिधि सत्र में नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने गए थे। इस दौरान एक नई नेशनल वर्किंग कमेटी बनाई गई। 

पार्टी अध्यक्ष से लेकर, महासचिव और कोषाध्याक्ष सब लोगों को बदल दिया गया है। नए पद और नए दस्तख़तों के साथ ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है। 80 में से 65 विधायक उनके साथ हैं। इसके अलावा अगर पार्षद और जिला संगठन के लोगों को मिला दिया जाए तो पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा लोग उनके गुट के साथ हैं। ऐसे में उनके ग्रुप को ही असली तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता दी जानी चाहिए। चुनाव आयोग ने अब तृणमूल कांग्रेस के दोनों खेमों को लेटर लिखकर छह जुलाई शाम साढ़े पांच बजे तक अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज़ जमा करने को कहा है।

ऋतब्रत बनर्जी ने कही ये बात

ऋतब्रत बनर्जी ने ये भी बताया कि वो ममता बनर्जी से अलग क्यों हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल का मतलब ज़मीनी स्तर होता है। तृणमूल कांग्रेस पहले ज़मीनी स्तर कार्यकर्ता की पार्टी थी, लेकिन अब ज़मीनी कार्यकर्ताओं की जगह वंशवाद ने ले ली। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि बंगाल की जनता इसे पसंद नहीं करती। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता भी नाराज़ हैं। इसलिए अब वो तृणमूल कांग्रेस पर दावा कर रहे हैं। पार्टी अब व्यक्ति पूजा से नहीं सामूहिक नेतृत्व से चलेगी।

ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने की चुनाव आयोग से मुलाकात

वहीं, ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने विरोधी गुट के दावों को बेबुनियाद बताया। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने गुरुवार को चुनाव आयोग से मिले लीडर्स को टुटपुंजिया नेता बताया। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि चुनाव आयोग की फुल बेंच ने इन नेताओं को मुलाकात की परमिशन क्यों दी। सागरिका घोष के मुताबिक चुनाव आयोग से किसी पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि ही मुलाकात कर सकते हैं, लेकिन इलेक्शन कमीशन ने जिस तरह इन नेताओं को मिलने के लिए बुलाया, उससे ज़ाहिर है कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है। 

खास बात ये है कि इस मामले में कांग्रेस के सीनियर लीडर अधीर रंजन चौधरी भी ममता बनर्जी के साथ हैं। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इन नेताओं ने जिस थाली में खाया, उसी में छेद कर रहे हैं..ये लोग ममता दीदी की मेहनत से नेता बने, विधायक बने..लेकिन आज उन्हीं से गद्दारी कर रहे हैं। 

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