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जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की तैयारी, अब क्या कहलाएगी?

 Reported By: Onkar Sarkar Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 03, 2026 11:27 pm IST,  Updated : Sep 03, 2026 11:27 pm IST

पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर ऋषि अरबिंद यूनिवर्सिटी करने का एक स्थानीय राजनीतिक प्रस्ताव सामने आया है। बीजेपी विधायक शरवरी मुखर्जी के प्रस्ताव के जवाब में CPM नेता सृजन भट्टाचार्य ने कहा कि यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर 'नाथूराम गोडसे यूनिवर्सिटी' कर देना चाहिए।

जादवपुर यूनिवर्सिटी- India TV Hindi
जादवपुर यूनिवर्सिटी Image Source : ANI

पश्चिम बंगाल के जादवपुर से बीजेपी विधायक शर्बरी मुखर्जी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव है कि यूनिवर्सिटी का नाम ऋषि अरबिंद यूनिवर्सिटी रखा जाए। शर्बरी मुखर्जी ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी के निर्माता ऋषि अरविंद है, उन्होंने इसका निर्माण इसलिए कराया था कि ब्रिटिश के खिलाफ बंगाली टैलेंट का विकास हो। कई राष्ट्रवादियों का मानना है कि यूनिवर्सिटी का नाम ऋषि अरविंद के नाम पर ही होना चाहिए

CPM नेता का पलटवार- 'नाथूराम गोडसे यूनिवर्सिटी' कर दीजिए

इस सुझाव के सामने आने के बाद राज्य की राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। वामपंथी छात्र संगठनों और नेताओं ने इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसका विरोध किया है। जादवपुर MLA का प्रस्ताव सुनने के बाद, यूनिवर्सिटी के पुराने छात्र और CPM नेता सृजन भट्टाचार्य इसका मज़ाक उड़ाने से नहीं चूके। शरबरी के प्रस्ताव को 'पूरा सपोर्ट' दिखाने के लिए, उनका काउंटर-प्रस्ताव यह था कि यूनिवर्सिटी का नाम सीधे 'नाथूराम गोडसे यूनिवर्सिटी' कर दिया जाए।

जादवपुर यूनिवर्सिटी के नाम पर सियासी संग्राम

सृजन का तर्क है कि बीजेपी या RSS जब भी किसी सड़क या इंस्टीट्यूशन का नाम बदलते हैं, तो वे अपनी राजनीतिक विचारधारा और फॉलोअर्स को सामने लाना चाहते हैं। पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर बनी सड़क या तितुमीर के नाम पर बने हॉल का नाम बदलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखा गया था। लेकिन ऋषि अरबिंदो स्वदेशी आंदोलन के अग्रणी, ब्रिटिश-विरोधी कट्टर लड़ाई के एक बहादुर योद्धा और अलीपुर बम केस के आरोपियों में से एक थे। दूसरी तरफ, बीजेपी या RSS का आज़ादी की लड़ाई में कोई पॉज़िटिव रोल निभाने का इतिहास नहीं रहा है, बल्कि वे कॉलोनियल राज के पक्ष में थे। इसलिए, लेफ्ट नेता का मानना ​​है कि ऋषि अरबिंदो जैसे कैरेक्टर के ज़रिए बीजेपी के लिए अपने राजनीतिक फायदे हासिल करना नामुमकिन है।

'शर्बरी मुखर्जी को नए नाम वाले संस्थान का VC बनाया जाना चाहिए'

सृजन ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर 'नाथूराम गोडसे यूनिवर्सिटी' करने के अलावा, मशहूर कलाकार नंदलाल बोस का बनाया यूनिवर्सिटी का पारंपरिक निशान काटकर उसकी जगह वीर सावरकर का अंग्रेजों को लिखा मशहूर 'प्रॉमिसरी नोट' लगाना चाहिए। इन सभी बुनियादी बदलावों के बाद, बीजेपी विधायक शर्बरी मुखर्जी को ही नए नाम वाले संस्थान का वाइस-चांसलर (VC) बनाया जाना चाहिए। लेफ्ट नेता के मुताबिक, "अगर ये मांगें पूरी हो जाती हैं, तो बीजेपी का असली एजेंडा सार्थक रूप लेगा और बेकार का ड्रामा खत्म हो जाएगा।"

ABVP के कार्यक्रम में विधायक ने रखा नाम बदलने का प्रस्ताव

बता दें कि गुरुवार को जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने 'तिरंगा यात्रा', राष्ट्रीय ध्वज फहराने और 'वंदे मातरम' गाने समेत कई कार्यक्रम आयोजित किए। संगठन के सदस्यों ने कैंपस में अलग-अलग जगहों पर कई विद्वानों की तस्वीरें भी लगाईं। इसके बाद, 'हरिपदा भारती स्मृति रक्षा समिति' की पहल पर त्रिगुण सेन ऑडिटोरियम में वेदांत पाठ और एक राष्ट्रवादी मीटिंग रखी गई। वहां राहुल सिन्हा, सुखेंदुशेखर रॉय और शर्बरी मुखर्जी जैसी हस्तियां मौजूद थीं। उस मंच से जादवपुर MLA ने यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा।

वहीं, आपको बता दें कि जादवपुर विश्वविद्यालय के वीसी चिरंजीव भट्टाचार्य ने परिसर की दीवारों पर लगातार हो रही लिखावट को लेकर छात्रों से एक खास अपील की है। 

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