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पश्चिम बंगाल में आकाशीय बिजली ने बरपाया कहर, 13 लोगों की मौत

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jul 24, 2025 09:18 pm IST,  Updated : Jul 24, 2025 09:18 pm IST

बांकुड़ा और पूर्वी बर्धमान में आकाशीय बिजली गिरने से 13 लोगों की मौत होने की खबर है। बांकुड़ा जिले में 8 लोगों की मौत हो गई जबकि पूर्वी बर्धमान में 5 लोगों की मौत होने की खबर है।

Lightning- India TV Hindi
आकाशीय बिजली Image Source : FILE

बांकुड़ा/बर्धमान: पश्चिम बंगाल में भी आकाशीय बिजली की घटनाओं से काफी जनहानि हुई है। राज्य के बांकुड़ा और पूर्व बर्धमान जिलों में बृहस्पतिवार को आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 

बांकुड़ा के पुलिस अधीक्षक वैभव तिवारी ने बताया कि जिले के विभिन्न हिस्सों में आंधी-तूफान के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से आठ लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि ओंडा में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कोटुलपुर, जॉयपुर, पतरासेयर और इंदास पुलिस थाना क्षेत्रों में एक-एक व्यक्ति की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हुई। 

आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि पूर्व बर्धमान जिले में आकाशीय बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। उन्होंने बताया कि माधवडीही में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि जिले के औसग्राम, मंगलकोट और रैना पुलिस थाना क्षेत्रों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। अधिकारी ने बताया कि झुलसे लोगों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। 

क्यों गिरती है आकाशीय बिजली?

आकाशीय बिजली या वज्रपात एक विशाल पैमाने पर होने वाला इलेक्ट्रोस्टैटिक डिस्चार्ज है, जो बादलों और पृथ्वी के बीच या खुद बादलों के भीतर होता है। इसके बनने और गिरने की प्रक्रिया काफी जटिल है। जब गर्म और नम हवा ऊपर उठती है, तो यह ठंडी होकर पानी की छोटी-छोटी बूंदों और बर्फ के कणों में बदल जाती है, जिनसे विशालकाय तूफानी बादलों (Cumulonimbus clouds) का निर्माण होता है। इन बादलों के भीतर हवा की तेज गति से पानी और बर्फ के कण आपस में टकराते हैं। इस घर्षण से ठीक उसी तरह स्थैतिक आवेश (static charge) पैदा होता है, जैसे सर्दियों में ऊनी कपड़ों से चिंगारी निकलती है।

इस प्रक्रिया में, बादल का ऊपरी हिस्सा धनात्मक (पॉजिटिव) रूप से चार्ज हो जाता है और निचला, भारी हिस्सा ऋणात्मक (नेगेटिव) रूप से चार्ज हो जाता है। बादलों के निचले हिस्से में मौजूद विशाल ऋणात्मक चार्ज, नीचे धरती की सतह पर मौजूद पेड़ों, इमारतों और जमीन पर एक धनात्मक चार्ज को प्रेरित करता है। जब बादल और जमीन के बीच विद्युत आवेश का अंतर बहुत अधिक हो जाता है, तो हवा, जो सामान्य रूप से बिजली की कुचालक होती है, इस विशाल वोल्टेज को रोक नहीं पाती। हवा आयनित होकर एक सुचालक प्लाज्मा पथ बना देती है, जिससे होकर बादल का ऋणात्मक चार्ज तेजी से धरती के धनात्मक चार्ज की ओर बहता है। इसी तीव्र विद्युत प्रवाह को हम आकाशीय बिजली का गिरना कहते हैं। इस प्रक्रिया में अत्यधिक गर्मी (30,000°C तक) और प्रकाश पैदा होता है और हवा के अचानक फैलने से हमें गरज की जोरदार आवाज सुनाई देती है।

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