महाराष्ट्र के एक सामाजिक संगठन 'जीवन आनंद संस्था' ने पिछले 12 सालों से लापता एक मानसिक रूप से अशक्त व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाया है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले का रहने वाला सफीकुल, जो मानसिक परेशानी के कारण अपने घर से भटक गया था।
43 वर्षीय सफीकुल 12 साल पहले घर से लापता हो गया था और उसके परिवार को उसके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। पांच महीने पहले उसे महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के पांडुर गांव में स्थित सविता आश्रम में भर्ती कराया गया था। यह आश्रम 'जीवन आनंद संस्था' द्वारा संचालित है।
कैसे मिला परिवार का पता?
संस्था के न्यासी किशन चौरे ने बताया कि उन्होंने सफीकुल के परिवार का पता लगाने के लिए उससे लगातार पांच महीने तक बात की। सफीकुल की बातचीत धीमी और अक्सर अस्पष्ट होती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार कोशिशों के बाद वह उसके मूल निवास के बारे में कुछ सुराग जुटाने में सफल रहे। इन सुरागों के आधार पर किशन चौरे ने गूगल सर्च का सहारा लिया और आखिरकार सफीकुल के गांव, जिले और उसके परिवार का पता लगा लिया। इस प्रयास में बीरभूम जिला नियंत्रण कक्ष, स्थानीय पुलिस और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने भी महत्वपूर्ण मदद की।
12 साल में पहली बार भाई से बात की
संस्था के न्यासी किशन चौरे ने बताया कि पिछले हफ्ते सफीकुल ने 12 साल में पहली बार अपने भाई अजहरुल इस्लाम से वीडियो कॉल के जरिए बात की, जो सभी के लिए एक बेहद भावुक पल था। सफीकुल के भाई अजहरुल और एक अन्य रिश्तेदार शुक्रवार को उसे वापस घर ले जाने के लिए पश्चिम बंगाल से आश्रम आए थे। (इनपुट- भाषा)
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