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उत्तराखंड-गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल की बारी, शुभेंदु सरकार कर रही UCC लागू करने की तैयारी, सोमवार को विधानसभा में पेश होगा बिल

 Published : Jun 27, 2026 02:08 pm IST,  Updated : Jun 27, 2026 02:08 pm IST

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकारी ने यूसीसी पर एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को विधानसभा में इससे संबंधित विधेयक पेश किया जाना है। अगर यूसीसी विधेयक पारित हो जाता है तो पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, गुजरात और असम की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

UCC bill West Bengal- India TV Hindi
पश्चिम बंगाल में UCC बिल लाने की तैयारी Image Source : PTI

पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में सोमवार, 29 जून 2026 को विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से जुड़ा विधेयक पेश किया जा सकता है। विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने बिल के मसौदे को सभी विधायकों के बीच साझा करने और इसके बाद सोमवार को चर्चा के लिए इसे पेश करने का फैसला किया है। इसके साथ ही सरकार एक नया एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल भी सदन में लाने की तैयारी में है। अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल इस बिल को लागू करने वाला चौथा राज्य बन जाएगा। अब तक तीन राज्यों गुजरात, उत्तराखंड और असम की सरकारें यूजीसी बिल लागू कर चुकी हैं।

सोमवार को पेश हो सकता है UCC बिल

जानकारी के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस की अध्यक्षता में गुरुवार शाम को हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यूसीसी विधेयक को सोमवार को सदन में पेश करने का फैसला लिया गया। इससे पहले इसका ड्राफ्ट सभी विधायकों को ईमेल के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा। सोमवार को विधानसभा में कुल पांच विधेयक पेश किए जाने हैं, जिनमें से एक यूसीसी बिल होने की संभावना है, जिसे सबसे अहम माना जा रहा है।

एक घंटे होगी चर्चा

जानकारी के मुताबिक, बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी विधेयकों पर चर्चा के लिए एक घंटे का समय निर्धारित रहेगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के स्वयं इस बहस में हिस्सा लेने की संभावना है। वहीं, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी भी चर्चा में शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित रैलियों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने के किए गए वादे के अनुरूप है।

क्या होंगे यूसीसी के प्रावधान?

अगर विधानसभा में यह विधेयक पारित होता है तो राज्य में सभी समुदायों के लिए समान नागरिक कानून लागू हो सकता है। उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू यूसीसी की तरह इसमें बहुविवाह पर रोक, विवाह की समान कानूनी आयु, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण, संपत्ति में महिलाओं और पुरुषों को समान (इक्वल जेंडर) अधिकार जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को इस बिल के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल भी होगा पेश

यूसीसी के अलावा शुभेंदु अधिकारी की सरकार 'वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026' भी सदन में पेश करेगी। प्रस्तावित कानून के तहत असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों को अधिकतम 12 महीने तक एहतियातन हिरासत यानी कि प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखा जा सकेगा। यह विधेयक काफी हद तक गुजरात के प्रिवेंशन ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज एक्ट, 1985 के आधार पर तैयार किया गया है।

हिरासत और एक्सटर्नमेंट के प्रावधान

प्रस्तावित बिल में 'गुंडा' की विस्तृत परिभाषा दी गई है। इसमें आदतन अपराध करने वाले, अपराध के लिए उकसाने या उसे बढ़ावा देने, वित्तीय मदद देने या संगठित गिरोह से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है। सरकार को हिरासत के 3 सप्ताह के अंदर मामला एडवाइजरी बोर्ड के सामने रखना होगा। इस बोर्ड के प्रमुख हाई कोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे। जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को वकील के माध्यम से भी अपना पक्ष रखने की अधिकार नहीं होगा। वहीं, नौ सप्ताह के भीतर बोर्ड द्वारा रिपोर्ट तैयार करके राज्य को सौंप देनी होगी। बोर्ड की मंजूरी मिलने पर आरोपी को 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकेगा। हालांकि, राज्य सरकार चाहे तो कभी भी हिरासत के आदेश को रद्द या उसे बदल सकती है। 

जिले से बाहर भेजने की भी होगी शक्ति

बिल में जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस कमिश्नर या डीआईजी स्तर से नीचे के नहीं होने वाले पुलिस अधिकारियों को 'एक्सटर्नमेंट ऑर्डर' जारी करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। इसके तहत किसी व्यक्ति जिसे गुंडा घोषित किया गया हो, को अधिकतम एक साल के लिए किसी जिले या क्षेत्र से बाहर जाने का आदेश दिया जा सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान रखा गया है, जिसमें 3 साल तक की जेल और जुर्माने हो सकता है। इतना ही नहीं गुंडा घोषित किए गए व्यक्ति को पनाह देने वालों को भी 2 साल तक की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है।

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