मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न और सिडनी में बृहस्पतिवार को लैंड हुए प्लेन से ISIS (इस्लामिक स्टेट) समूह से कथित रूप से संबंध रखने वाली ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं और बच्चों को निकलते देखकर हर कोई हैरान रह गया। बताया जा रहा है कि एक विमान में तीन ऑस्ट्रेलियाई महिलाएं और आठ बच्चे मेलबर्न में लैंड हुए, जबकि दूसरे विमान में एक महिला और उसका बेटा थोड़ी देर बाद सिडनी उतरे। यह सभी आईएसआईएस आतंकी समूह से जुड़े थे।
कैसे ऑस्ट्रेलिया पहुंचे आईएसआईएस से जुड़े महिलाएं और बच्चे
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बुधवार को घोषणा की थी कि सीरिया के रेगिस्तानी शिविर में कई वर्ष बिताने वाले इन 13 लोगों को स्वदेश वापस लाया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि इन महिलाओं पर इस्लामिक स्टेट के ‘खिलाफत’ (कैलिफेट) में बिताए समय से जुड़े आपराधिक आरोप लगाए जा सकते हैं। यह कैलिफेट सीरिया और इराक में फैला हुआ था। दोनों कतर एयरवेज की उड़ानें दोहा से कुछ मिनट के अंतराल पर रवाना हुईं। पहले QR904 मेलबर्न पहुंची, उसके तुरंत बाद QR908 सिडनी पहुंची। ऑस्ट्रेलियाई सरकार पहले इन महिलाओं की निंदा कर चुकी थी क्योंकि उन्होंने ISIS आतंकियों का समर्थन करते हुए सीरिया जाने का फैसला किया था और सरकार ने उन्हें वापस लाने से इनकार कर दिया था।
सीरिया में हो रहा था अत्याचार
पुलिस पिछले एक दशक से ज्यादा समय से ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों द्वारा सीरिया में अत्याचारों, आतंकवाद संबंधी अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों (जैसे गुलाम व्यापार) में संभावित संलिप्तता की जांच कर रही है। डीकिन यूनिवर्सिटी के उग्रवाद विशेषज्ञ जोशुआ रूज ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी कैलिफेट के अंदर यजीदी महिलाओं को गुलाम बनाए जाने और शरिया कानून के सख्त प्रवर्तन जैसी घटनाओं की जांच कर रहे हैं। रूज ने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन को बताया, “सबसे बुरे रूप की हिंसा में कुछ महिलाओं ने भी सक्रिय भूमिका निभाई थी, इसलिए हमें समझना होगा कि यह समस्या गंभीर है।”
ऑस्ट्रेलिया नागरिकों को आईएसआईएस के चंगुल से निकालने की हुई थी अपील
बच्चों की भलाई पर काम करने वाली संस्था "सेव द चिल्ड्रेन" ने 2024 में अदालत में याचिका दायर कर सरकार को सीरियाई शिविरों से नागरिकों को वापस लाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की थी, लेकिन वह असफल रही। संस्था ने ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी मैट टिंकलर ने कहा कि अब सरकार को लौटे बच्चों की भलाई को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “इस समूह में दो-तिहाई बच्चे हैं। महिलाओं और उनके फैसलों पर बहुत ध्यान दिया गया है, लेकिन अब ध्यान इन बच्चों पर होना चाहिए... ताकि उन्हें ऑस्ट्रेलिया में सामान्य जीवन शुरू करने का मौका मिल सके।”