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तालिबान से बातचीत कर रहा है भारत, कतर के विशेष दूत ने किया दावा

सोमवार को एक वेबिनार में बोलते हुए, मुतलाक बिन मजीद अल-कहतानी, जो कतर के विदेश मंत्री के विशेष दूत हैं, ने कहा कि उनका मानना​है कि भारत तालिबान से  इसलिए नहीं बातचीत कर रहा है क्योंकि वे अफगानिस्तान पर कब्जा कर सकते हैं, बल्कि यह कि वे वहां नई शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (राजनीतिक सेटअप) हैं। 

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: June 23, 2021 9:17 IST
India is talking to Taliban says Qatar तालिबान से बातचीत कर रहा है भारत, कतर के विशेष दूत ने किया दा- India TV Hindi
Image Source : PTI (FILE) तालिबान से बातचीत कर रहा है भारत, कतर के विशेष दूत ने किया दावा

नई दिल्ली. अफगानिस्तान में आने वाले दिनों में भारत की एक बड़ी भूमिका है। इस बात को खुद दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका भी स्वीकार कर चुका है। इस बीच कतर के एक विशेष दूत ने खुलासा किया है कि भारतीय अधिकारियों ने दोहा में तालिबान प्रतिनिधियों से "चुपचाप" मुलाकात की थी। जिसके बाद भारतीय सूत्रों ने संकेत दिया है कि हाल के दिनों में रुक-रुक कर संपर्क हुआ था। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में इसकी जानकारी दी गई।

सोमवार को एक वेबिनार में बोलते हुए, मुतलाक बिन मजीद अल-कहतानी, जो कतर के विदेश मंत्री के विशेष दूत हैं, ने कहा कि उनका मानना​है कि भारत तालिबान से  इसलिए नहीं बातचीत कर रहा है क्योंकि वे अफगानिस्तान पर कब्जा कर सकते हैं, बल्कि यह कि वे वहां नई शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (राजनीतिक सेटअप) हैं। अल-कहतानी ने कथित तौर पर वेबिनार के दौरान कहा, "मैं समझता हूं कि तालिबान के साथ बात करने के लिए भारतीय अधिकारियों द्वारा एक quiet visit की गई है ... क्योंकि तालिबान अफगानिस्तान के भविष्य का एक प्रमुख घटक है, या होना चाहिए या होने वाला है।" उन्होंने कहा कि प्रयास सभी पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान पर पहुंचने का आग्रह करने का होना चाहिए।

कहा जा रहा है कि भारतीय पक्ष की तरफ से बातचीत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा संचालित की जा रही है। यह अभी भी एक अनौपचारिक स्तर पर है और अभी तक इसे किसी formal engagement में शामिल नहीं किया गया है। दोनों पक्षों में पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न स्तरों पर रुक-रुक कर संपर्क हुए हैं। हालांकि तालिबान को अभी तक कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है, क्योंकि भारत सरकार ने काबुल में सरकार के साथ डील करना पसंद किया है। अगर जमीन पर स्थितियां बदलती हैं, तो सूत्रों का कहना है कि भारत तालिबान से बातचीत करेगा।

इस बारे में जब MEA के प्रवक्त अरिंदम बागची से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हम अफगानिस्तान के विकास और पुनर्निर्माण के लिए अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं के अनुसरण में विभिन्न हितधारकों के संपर्क में हैं।

हालांकि, अफगानिस्तान में सरकार की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ रही है। विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने कहा कि हाल के हफ्तों में तालिबान द्वारा "लक्षित हत्याएं" और "क्षेत्रीय आक्रमण" ने अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हिंसा के स्तर और तथ्य यह है कि कतर और अन्य जगहों पर बातचीत के बावजूद, हिंसा के माध्यम से उनके द्वारा सत्ता की चाहत ने इसे किसी भी तरह से अनिश्चित वातावरण बना दिया है।"

उन्होंने कहा, "उनमें से कई बातचीत चल रही है, लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि स्थिति अस्थिर और अनिश्चित है और इस समय, यह कहना बहुत मुश्किल है कि चीजें कैसे काम करेंगी।"

आपको बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर पिछले कुछ हफ्तों में दो बार कतर में थे, जहां उन्होंने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सहित कतर के नेतृत्व से मुलाकात की, बल्कि अफगानिस्तान में अमेरिका के विशेष दूत जलमय खलीलजाद के साथ भी समय बिताया, जो उस समय दोहा में थे।

बागची ने बताया कि इस दौरान उन्होंने अपने कतरी समकक्ष के साथ-साथ कतर के नेतृत्व के वरिष्ठ सदस्यों से मुलाकात की। चूंकि कतर अफगान शांति प्रक्रिया में शामिल है, इसलिए विदेश मंत्री की बातचीत के दौरान अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री की यात्रा की इस अवधि के दौरान अमेरिका के विशेष दूत जलमय खलीलजाद दोहा में थे और उन्होंने विदेश मंत्री से मुलाकात की और उन्हें अफगानिस्तान के संबंध में हाल की घटनाओं के बारे में जानकारी दी।

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