यरूशलम: इस्राइल ने यहां तीन सप्ताह की हिंसा के बाद तनाव कम करने के प्रयास के तहत अल अक्स मस्जिद परिसर से प्रतिबंध आज हटा लिया। अमेरिका ने इस कदम का स्वागत किया है। इस्राइल का यह कदम ऐसे समय में आया है जब फलस्तीन राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने सुरक्षाबलों एवं राजनीतिक गुटों को हिंसा की स्थिति और बिगड़ने से रोकने का निर्देश दिया है जिसकी वजह से फिर से विद्रोह उत्पन्न होने का भय पैदा हो गया है। अल अक्स मस्जिद परिसर क्रुद्ध प्रदर्शनों का केंद्र रही है जो पूर्वी यरूशलम और कब्जे वाले पश्चिम तट में फैल गया था। मंगलवार को प्रदर्शन का असर मध्य इस्राइल तक दिखायी दिया जब नकाबपोश अरब इस्राइली प्रदर्शनकारियों ने तेल अवीव के जाफा जिले में पथराव किया।
फलस्तीनियों को डर है कि इस्राइल का दक्षिणपंथी गठबंधन उन नियमों को बलदने वाला है जो यहूहिदयों को मस्जिद परिसर में आने, न कि उपासना करने की इजाजत प्रदान करते हैं। यह स्थल दोनों धर्मावलंबियों के लिए पवित्र है। यरूशल के पुराने शहर में इस परिसर और उसके ईद-गिर्द यहूदी धार्मिक दिवसों पर बार बार झड़पे हुई हैं। इन अवसरों वर यहूदी आंगुतकों की संख्या में इजाफा होता रहा है। अशांति की वजह से इस्रायल ने रविवार से 50 से कम उम्र के मुसलमानों के आने पर रोक लगा दी। लेकिन पुलिस ने मंगवार को घोषणा की कि बुधवार से मुसलमानों की नमाज के लिये समय पर प्रतिबंध हटा लिया जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मार्क टोनर ने इस कदम को तनाव कम करने के लिये सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है। इस्राइली और फलस्तीनी सुरक्षा अधिकारियों ने भी मंगलवार की शाम को पश्चिमी तट के एक अज्ञात स्थान पर शांति कायम करने के मकसद से बैठक की थी। इस बैठक के बाद ही अब्बास की संयम बरतने की अपील सामने आयी।