इस्लामाबाद: अफगानी तालिबान ने संस्थापक मुल्ला उमर की उनके धार्मिक छात्र जीवन की एक विरल तस्वीर जारी की है। वैसे अभी तक उसकी साफा बांधे अधपकी दाढ़ी वाली एक ही तस्वीर नजर आती थी, जिसमें उसकी दाईं आंख बेनूर नजर आती है।
1978 में ली गई तस्वीर को पहली बार तालिबान के आधिकारिक साइट पर लगाया गया था।
इसकी स्पष्ट स्कैन प्रति आज एएफपी को मिली जिसमें युवा घनी दाढ़ी वाला उमर दिख रहा है जिसने अपने परंपरागत अफगानिस्तान लबादे पर वेस्टकोट पहना है और हरी पगड़ी बांधे वह सीधे कैमरे की तरफ देख रहा है।
तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएफपी को तस्वीर भेजी और कहा कि वास्तव में यह श्वेत-श्याम तस्वीर है जिसे बाद में रंगीन किया गया।
उमर की जिंदगी और मौत रहस्यों में रहे हैं और नयी तस्वीर उसके दो प्रमाणित फोटोग्राफ में से एक है।
उसकी आधिकारिक जीवनी के अनुसार उसका जन्म 1960 में अफगान के दक्षिणी प्रांत कांधार में एक सामान्य परिवार में हुआ था और 1980 के दशक में सोवियत सेना के अधिग्रहण के खिलाफ अफगान मुजाहिदीन के साथ लड़ते हुए उसकी दाईं आंख चली गई थी।
कहा जाता है कि लड़ाई के दौरान आंख में छर्रा लगने के बाद तालिबान के इस नेता ने खुद अपनी घायल आंख को निकाल दिया था। हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि उसका पाकिस्तान के एक अस्पताल में इलाज किया गया था।