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नेपाल के अन्नपूर्णा सर्किट में भारतीय ट्रेकर की दर्दनाक मौत, 4200 मीटर की ऊंचाई पर यमराज ने छीनी जिंदगी

 Published : Nov 05, 2025 11:41 pm IST,  Updated : Nov 05, 2025 11:41 pm IST

नेपाल के अन्नपूर्णा सर्किट में एक भारतीय पर्वतारोही की मौत हो गई है। वह पत्नी और दोस्तों के साथ हिमालय की वादियों में निकले थे, लेकिन यमराज के दूतों ने उन्हें रास्ते में ही निगल लिया।

नेपाल की पर्वत चोटी (प्रतीकात्मक)- India TV Hindi
नेपाल की पर्वत चोटी (प्रतीकात्मक) Image Source : AP

काठमांडू: हिमालय की गोद में बसे नेपाल के अन्नपूर्णा सर्किट में एक भारतीय ट्रैकर की दर्दनाक मौत हो गई है। यह हादसा मंगलवार सुबह 4,200 मीटर की दुर्गम ऊंचाई पर थोरंग दर्रा के निकट हुहा, जहां 54 वर्षीय भारतीय नागरिक पिंटू मुखर्जी की 'ऑल्टीट्यूड सिकनेस' (ऊंचाई बीमारी) से अचानक मौत हो गई। यह घटना ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए बड़ा झटका है।

पेशे से इंजीनियर थे पिंटू

अन्नपूर्णा की मनमोहक वादियों को जीतने की कोशिश में जान जोखिम में डालने वालों के लिए यह घटना एक बड़ा सबक भी है। कोलकाता के रहने वाले पिंटू एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वह अपनी पत्नी और दोस्तों के साथ सपनों की इस यात्रा पर निकले थे, लेकिन प्रकृति के क्रूर चेहरे ने उनके सपनों को चूर कर दिया। घटना मंगलवार तड़के घटी, जब पिंटू अपनी चार सदस्यीय टीम के साथ थोरंग दर्रा की ओर बढ़ रहे थे। लगभग पांच घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद अचानक सीने में तेज दर्द शुरू हो गया।

ऊंचाई पर आक्सीजन की कमी

टीम के सदस्यों ने तुरंत सहायता मांगी, लेकिन ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी ने हालात बिगाड़ दिए। मनांग जिला पुलिस कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "वे होटल लौट चुके थे, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर एक कुली ने उन्हें स्ट्रेचर पर लादकर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र की ओर ले जाया। रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं।" मनांग जिला, काठमांडू से करीब 400 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित, नेपाल के सबसे खतरनाक ट्रेकिंग जोन में शुमार है। यहां ऑल्टीट्यूड सिकनेस जैसी बीमारियां आम हैं, जो सिरदर्द, उल्टी और फेफड़ों में पानी भरने जैसी जटिलताओं का रूप ले लेती हैं।

सबसे खतरनाक ट्रैकिंग सर्किट में शुमार है अन्नपूर्णा

अन्नपूर्णा सर्किट, दुनिया के सबसे लोकप्रिय ट्रेकिंग रूट्स में से एक, 200 से अधिक किलोमीटर लंबा है। यह अन्नपूर्णा, धौलागिरी और माचापुचारे जैसे हिमालयी चोटियों को घेरता हुआ प्रकृति का अनुपम नजारा पेश करता है। हर साल हजारों पर्यटक, खासकर भारतीय, यहां आते हैं, लेकिन ऊंचाई 5,400 मीटर तक पहुंचने पर खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 3,000 मीटर से ऊपर एक्सपोजर सीमित रखना चाहिए और दवाओं जैसे डायमॉक्स का इस्तेमाल अनिवार्य है। नेपाल पर्यटन विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों में यहां 20 से अधिक ट्रेकर्स की मौत हुई, ज्यादातर ऊंचाई बीमारी से हुई।

पिंटू की मौत के बाद भारतीय दूतावास कर रहा शव वापस लाने में मदद

पिंटू की मौत के बाद भारतीय दूतावास ने शव को काठमांडू लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि टीम सदस्य सदमे में हैं। यह घटना ट्रेकिंग उत्साहियों को चेतावनी देती है कि साहस के साथ तैयारी जरूरी है। चिकित्सकीय जांच, गाइड की मौजूदगी और मौसम पूर्वानुमान अनदेखा न करें। पिंटू की पत्नी ने बताया, "वह हमेशा कहते थे कि हिमालय हमें बुलाता है, लेकिन आज यह बुलावा हमें तोड़ गया।" नेपाल सरकार ने सुरक्षा मानकों को सख्त करने का वादा किया है, लेकिन सवाल वही है कि क्या पर्यटक इन जोखिमों को समझते हैं? अन्नपूर्णा की सुंदरता लुभाती है, लेकिन उसकी ऊंचाई घातक भी साबित हो सकती है। (भाषा)

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