Iran US War: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को तेहरान के तबास में 5 मई 1980 में उसकी ऐतिहासिक हार की याद दिलाई है। पेजेश्कियन ने एक पोस्ट में कहा है कि ऐसी ऐतिहासिक हारें दुनिया की घमंडी ताकतों के लिए सबक हैं।
पेजेश्कियन ने एक्स पर लिखा पोस्ट
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एक्स पर लिखा, "5 मई अमेरिका की तबास में ऐतिहासिक हार की वर्षगांठ है, जहां ईश्वरीय श्रेष्ठता किसी भी अन्य इच्छाशक्ति पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हुई थी। इस वर्ष भी ईश्वर की कृपा से, दक्षिणी इस्फहान में एक और तबास हुआ, जो यह दिखाता है कि तबास की रेत का भगवान इस भूमि के लोगों का रक्षक है। मुझे आशा है कि ऐसी ऐतिहासिक हारें दुनिया की घमंडी ताकतों के लिए सबक बनें।"
तबास में क्या हुआ था?
तबास ईरान के दक्षिणी खोरासन प्रांत में स्थित एक शहर है। यहां अमेरिकी हार का इतिहास उसके ऑपरेशन ईगल क्लॉ से जुड़ा है। 24-25 अप्रैल 1980 को अमेरिका तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने यह गुप्त सैन्य अभियान शुरू किया था। इसकी वजह
नवंबर 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के दौरान छात्रों ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया था। छात्रों ने 53 अमेरिकी राजनयिकों को बंधक बना लिया था। लिहाजा उन्हें मुक्त कराना जिमी कार्टर के मान-सम्मान से जुड़ गया था। कार्टर प्रशासन ने कूटनीति से बातचीत विफल होने के बाद इन बंधकों को बचाने के लिए सैन्य अभियान चलाने का फैसला किया।
तबास में कैसे हुई अमेरिका की हार?
अमेरिकी सेना ने अपने 53 राजनयिकों को छुड़ाने के लिए 8 हेलीकॉप्टर और C-130 विमानों के साथ ईरान के तबास के पास रेगिस्तानी इलाके में लैंडिंग की, लेकिन रेत का तूफान, यांत्रिक खराबी और खराब मौसम के कारण केवल 5 हेलीकॉप्टर ही काम करने लायक बचे। 3 हेलीकॉप्टर खराब हो गए। जबकि अभियान को सफल करने के लिए न्यूनतम 6 हेलीकॉप्टर की जरूरत थी, इसलिए मिशन बीच में रद्द कर दिया गया। वापसी में एक हेलीकॉप्टर और C-130 विमान में टक्कर हो गई, जिसमें आग लग गई और 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए। ऐसे में अमेरिका का कोई बंधक बचाया जा सका सका। ईरान में इसे अमेरिका की शर्मनाक हार और ईश्वरीय मदद के रूप में देखा जाता है। इस असफलता के बाद अमेरिकी सेना में विशेष अभियान कमांड (SOCOM) का गठन हुआ।
5 मई को क्या हुआ था?
अमेरिका ने यह अभियान 24-25 अप्रैल 1980 को चलाया था, जिसमें उसके सैनिकों की मौत हो गई थी। ईरान ने इस अभियान में मारे गए अमेरिकी सैनिकों का शव वाशिंगटन को 5 मई को सौंपा था। लिहाजा इतिहास में ईरान इसे 5 मई को तबास में अमेरिका की हार के रूप में मनाता है। इससे अमेरिका की भारी बेइज्जती हुई थी।