काठमांडू: नेपाल में जेन-जी के आंदोलन के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाली सुशीला कार्की और उनकी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की पार्टी नेकपा (यूएमएल) की याचिका पर अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही 12 सितंबर को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा संसद भंग करने के फैसले पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति प्रकाशमान सिंह राउत की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने अंतरिम सरकार, राष्ट्रपति कार्यालय और महान्यायवादी कार्यालय को सात दिनों के भीतर लिखित जवाब देने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला संसद भंग करने और अंतरिम सरकार गठन से जुड़े सभी पुराने केसों के साथ एक साथ सुना जाएगा। याचिका में मुख्य दलीलें:पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना संविधान के अनुच्छेद 76 और 132(2) का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि संविधान के मुताबिक प्रधानमंत्री संसद सदस्य या पूर्व सांसद ही हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि सुशीला कार्की कभी संसद सदस्य नहीं रहीं, इसलिए उनकी नियुक्ति पूर्णतः असंवैधानिक है।
संसद को बहाल करने का आदेश देने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि राष्ट्रपति द्वारा संसद भंग करना और अंतरिम सरकार गठन करना अवैध है। अंतरिम कैबिनेट के सभी फैसले रद्द किए जाएं और संसद तुरंत बहाल की जाए। याचिकाकर्ताओं ने पूरी अंतरिम सरकार को “अवैध और असंवैधानिक” करार दिया है। पृष्ठभूमि: कैसे बदली सत्ता9 सितंबर 2025 को ‘जेन जेड’ के नेतृत्व में भ्रष्टाचार-विरोधी और सोशल मीडिया बैन हटाने के आंदोलन हिंसक हो गए। दो दिनों की हिंसा में 76 लोगों की मौत हुई। दबाव में के.पी. शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से हटाया गया।
12 सितंबर को ली थी शपथ
नेपाल की पूर्व न्यायाधीश सुशीला कार्की को 12 सितंबर को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उसी दिन उनकी सिफारिश पर प्रतिनिधि सभा भंग कर दी थी। मगर अब कोर्ट ने इस पर नोटिस जारी करके कारण पूछा है। नेपाल की अंतरिम सरकार ने अगले आम चुनाव के लिए 5 मार्च 2026 की तारीख तय की है।
कोर्ट में एक दर्जन से ज्यादा याचिकाएं
ओली की पार्टी के नेकपा (यूएमएल) के अलावा कई स्वतंत्र वकीलों और नागरिक समूहों ने भी संसद भंग करने के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। सभी का एक ही सवाल है: क्या संविधान के बाहर जाकर पूर्व जज को प्रधानमंत्री बनाना और संसद भंग करना लोकतंत्र की हत्या नहीं है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट अंतरिम सरकार को असंवैधानिक घोषित करता है, तो नेपाल में एक बार फिर गंभीर संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है। फिलहाल देश की सांसें कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं। (भाषा)