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पाकिस्तान: PoK के गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ ने मचाई तबाही, भूस्खलन की चपेट में आने से 9 लोगों की हुई मौत

 Edited By: Amit Mishra
 Published : Aug 11, 2025 05:45 pm IST,  Updated : Aug 11, 2025 05:45 pm IST

पाकिस्तान में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा दी है। यहां भूस्खलन की चपेट में आने से 9 लोगों की मौत हो गई है। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं। विशेषज्ञों ने इसे लेकर चेतावनी भी दी है।

पाकिस्तान में भूस्खलन - India TV Hindi
पाकिस्तान में भूस्खलन Image Source : AP

पेशावर: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित क्षेत्र में बाढ़ से क्षतिग्रस्त दरिया की मरम्मत के दौरान भूस्खलन में दबकर 9 लोगों की मौत हो गई। इस दौरान 3 तीन अन्य लोग घायल भी हुए हैं। अधिकारियों ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी है। पुलिस ने बताया कि यह घटना रविवार रात दान्योर नाले पर घटी जब भारी मात्रा में मिट्टी श्रमिकों पर गिर गई और मलबे के नीचे दबने से कई लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद स्थानीय अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है साथ ही बचाव कार्य शुरू किया गया है। अस्पताल के अधिकारियों ने 9 मौतों की पुष्टि करते हुए और चेतावनी दी है कि और लोग फंसे हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि घायलों का इलाज किया जा रहा है। 

अचानक आ गई बाढ़

एक अलग घटना में, पिछले शुक्रवार को शीशपर ग्लेशियर से बनी एक झील के तटबंध टूटने से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अचानक आई बाढ़ के चलते पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाले काराकोरम राजमार्ग का एक हिस्सा बह गया था। ‘द डॉन’ अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ ने सुरक्षात्मक दीवारों को नष्ट कर दिया था, कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा था साथ ही 50 से अधिक घरों को खतरा पैदा हो गया है। 

2018 के बाद आई सबसे भयानक बाढ़

अधिकारियों ने कहा कि यह 2018 के बाद से हसनाबाद दरिया में आई सबसे भीषण बाढ़ थी, जिससे अलीबाद और आसपास के गांवों की सिंचाई और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था क्षतिग्रस्त हो गई और हुंजा की अधिकांश आबादी का मुख्य सड़क संपर्क टूट गया। हुंजा और नगर के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीबीडीएमए) के सहायक निदेशक जुबैर अहमद खान ने कहा, ‘‘बाढ़ 2018 के बाद से दरिया में आई सबसे भीषण बाढ़ थी।’’ 

विशेषज्ञों ने दी है चेतावनी

बाढ़ ने क्षेत्र के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित किया। नगर खास में होपर वैली मार्ग अवरुद्ध हो गया, टोकोरकोट गांव में एक पुल बह गया और शिमशाल घाटी में एकमात्र पहुंच मार्ग तथा तटबंधों को नुकसान पहुंचा है। सिंचाई और पेयजल आपूर्ति प्रणालियों की बहाली ठप हो गई, जिससे कुछ क्षेत्रों में हजारों लोग पीने के पानी से वंचित रह गए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष बार-बार चलने वाली गर्म लहरों (हीटवेव) और रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने ग्लेशियरों के पिघलने की गति को तेज कर दिया है, जिससे इस क्षेत्र में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ गई है। (भाषा)

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