इस्लामाबाद: पाकिस्तान और झूठ के बीच अटूट रिश्ता है। धोखा और दोगलापन तो इस देश की नसों में खून बनकर बहता है। एक बार फिर पाकिस्तान का झूठ सामने आया है। अपनी हरकतों पर पर्दा डालने के लिए अब ये मुल्क झूठ का सहारा ले रहा है। दरअसल, पाकिस्तान ने अब उन आरोपों को खारिज कर दिया कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व मनाने के लिए भारत से आए समूह के कुछ हिंदु सदस्यों को देश में प्रवेश करने नहीं दिया गया।
हिंदू शख्स के साथ क्या हुआ?
पाकिस्तान ने इन आरोपों को ‘निराधार और भ्रामक’ बताया है। प्रकाश पर्व के लिए लगभग 1,900 सिख तीर्थयात्रियों का एक समूह मंगलवार को अटारी-वाघा सीमा पार करके पाकिस्तान पहुंचा था। इस दौरान एक हिंदू शख्स ने बताया था कि उसे और उसके परिवार के छह सदस्यों को उनके धर्म के कारण वापस भेज दिया गया।
पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने क्या कहा?
पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘पाकिस्तान स्पष्ट रूप से निराधार और भ्रामक आरोपों को खारिज करता है कि हिंदू समुदाय के सदस्यों को देश में प्रवेश से मना किया गया।’’ उन्होंने कहा कि बहुत कम संख्या में ऐसे लोग थे जिनके पास अधूरे दस्तावेज थे और वो आव्रजन अधिकारियों को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसलिए, उनसे मानक प्रक्रियाओं के अनुसार भारत लौटने का अनुरोध किया गया।

'प्रशासनिक थी कार्रवाई'
ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा‘‘यह कहना कि इन व्यक्तियों को धार्मिक आधार पर प्रवेश नहीं करने दिया गया, पूरी तरह से गलत और शरारतपूर्ण है।’’ प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा सभी धर्मों के तीर्थयात्रियों का स्वागत किया है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि संबंधित कार्रवाई प्रशासनिक थी, जो पाकिस्तान के अपने क्षेत्र में नियमों के अनुरूप थी।
जानें पूरा मामला
अमर चंद नाम के एक शख्स को उनके परिवार के छह सदस्यों के साथ पाकिस्तान जाने के बाद वापस भेज दिया गया था। चंद ने दावा किया कि उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। दिल्ली निवासी चंद ने यह भी दावा किया कि लखनऊ के रहने वाले सात और भारतीयों को पाकिस्तान ने वापस भेज दिया। (भाषा)
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