ताइपे: प्रशांत महासागर में स्थित छोटे द्वीपीय देश पलाऊ ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह ताइवान के साथ अपने राजनयिक संबंध बनाए रखेगा और किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। करीब 18 हजार की आबादी वाले इस देश ने चीन के आर्थिक, राजनीतिक और साइबर दबाव के बावजूद ताइवान का समर्थन जारी रखने का फैसला दोहराया है। ताइवान के अखबार ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने घोषणा की है कि उपराष्ट्रपति शियाओ बी-खिम शनिवार से अगले बुधवार तक पलाऊ की यात्रा करेंगी। यह यात्रा पलाऊ के राष्ट्रपति सुरांगेल व्हिप्स जूनियर के निमंत्रण पर हो रही है।
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चीन ने ताइवान से संबंध तोड़ने का डाला दबाव
पलाऊ के राष्ट्रपति सुरांगेल व्हिप्स जूनियर कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि चीन ने पलाऊ पर ताइवान से अपने राजनयिक संबंध समाप्त करने का दबाव बनाया है। अप्रैल में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि चीनी अधिकारियों ने सीधे तौर पर उनके देश से ताइवान के खिलाफ बयान देने और उससे दूरी बनाने को कहा था, लेकिन उनकी सरकार ने इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया। व्हिप्स ने कहा कि किसी भी विदेशी शक्ति को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह पलाऊ को बताए कि उसे किन देशों के साथ संबंध रखने चाहिए।
पर्यटन को बनाया गया दबाव का हथियार
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पलाऊ पर दबाव बनाने के लिए पर्यटन क्षेत्र का भी इस्तेमाल किया। वर्ष 2017 में जब पलाऊ ने ताइवान के बजाय चीन को मान्यता देने से इनकार कर दिया, तब बीजिंग ने अपने नागरिकों के पलाऊ जाने वाले ग्रुप टूरिज्म पर प्रतिबंध लगा दिया। इसका सीधा असर पलाऊ की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ा। बाद में चीनी अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यात्रा संबंधी चेतावनियां भी जारी कीं। पलाऊ ने इसे अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की एक और कोशिश माना। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने यह भी प्रस्ताव दिया था कि यदि पलाऊ ताइवान से संबंध तोड़ ले तो बड़ी संख्या में चीनी पर्यटकों को वहां भेजा जाएगा, लेकिन पलाऊ सरकार ने यह प्रस्ताव भी ठुकरा दिया।
पलाऊ ने चीन पर लगाए थे कई गंभीर आरोप
आर्थिक दबाव के साथ-साथ पलाऊ को सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। वर्ष 2024 में हैकरों ने सरकार के 20 हजार से अधिक गोपनीय दस्तावेज लीक कर दिए थे। इनमें ताइवान के साथ राजनयिक संपर्कों और अमेरिका-जापान से जुड़ी सैन्य गतिविधियों की जानकारी भी शामिल थी। पलाऊ के राष्ट्रपति सुरांगेल व्हिप्स जूनियर ने कहा था कि उपलब्ध सबूत चीन की संभावित भूमिका की ओर इशारा करते हैं, हालांकि चीन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। वहीं, कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीन समर्थित नेटवर्क निवेश, मीडिया कैंपेन और लॉबिंग के जरिए पलाऊ पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं।
ताइवान के साथ पूरी तरह अडिग खड़ा है पलाऊ
लगातार आर्थिक, राजनीतिक और साइबर दबाव के आरोपों के बावजूद पलाऊ ने साफ संकेत दिया है कि वह ताइवान के साथ अपने संबंध बनाए रखेगा। छोटे आकार और सीमित संसाधनों के बावजूद पलाऊ का यह रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि पलाऊ का यह फैसला इस बात का संकेत है कि कई छोटे देश भी अपनी विदेश नीति को लेकर स्वतंत्र रुख अपनाने की कोशिश कर रहे हैं और चीन जैसे देशों के दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं।