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चीन को यूरोप के इस देश ने दिया करारा जवाब, कहा- 'ड्रैगन हमें न बताए कि हम किससे रिश्ते बनाएं'

 Published : Jun 03, 2026 06:34 pm IST,  Updated : Jun 03, 2026 06:34 pm IST

चेक गणराज्य की सीनेट के अध्यक्ष मिलोस विस्ट्रचिल ने ताइवान दौरे के दौरान चीन की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि बीजिंग यह तय नहीं कर सकता कि चेक गणराज्य किससे संबंध रखे। उन्होंने ताइवान के साथ सहयोग का समर्थन किया, जबकि ताइवान ने चेक समर्थन और बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों का स्वागत किया।

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चीन ने चेक रिपब्लिक से 'वन चाइना' नीति का पालन करने को कहा है। Image Source : AP

ताइपे: ताइवान को लेकर चीन के द्वारा लगातार दी जा रही धमकियों पर यूरोपीय देश चेक गणराज्य ने करारा जवाब दिया है। चेक गणराज्य की सीनेट के अध्यक्ष मिलोस विस्ट्रचिल ने ताइवान दौरे के दौरान चीन के उस विरोध को सख्ती से खारिज कर दिया, जिसमें बीजिंग ने प्राग और ताइपे के बीच बढ़ते संबंधों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने साफ कहा कि चीन को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि चेक गणराज्य किस देश या क्षेत्र के साथ संबंध बनाएगा।

'ताइवान और चेक गणराज्य दोनों ही संप्रभु देश'

ताइवान की संसद में स्पीकर हान कुओ-यू के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में विस्ट्रचिल ने कहा कि ताइवान और चेक गणराज्य दोनों ही संप्रभु और लोकतांत्रिक इकाइयां हैं, जो अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि चेक गणराज्य अपने मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का फैसला स्वयं करेगा और किसी बाहरी शक्ति के निर्देशों पर नहीं चलेगा। विस्ट्रचिल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब प्राग स्थित चीनी दूतावास ने उनके ताइवान दौरे की आलोचना करते हुए इसे चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया था।

चीन ने किया था दोनों देशों के रिश्तों का विरोध

चीनी दूतावास ने एक बार फिर ताइवान और चीन से राजनयिक संबंध रखने वाले देशों के बीच आधिकारिक संपर्कों का विरोध किया और चेक गणराज्य से ‘वन चाइना’ सिद्धांत का सख्ती से पालन करने की अपील की। हालांकि, विस्ट्रचिल ने चीन की इस आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि चेक गणराज्य अपनी स्वतंत्र ‘वन चाइना’ नीति का पालन करता है, न कि बीजिंग की व्याख्या का। उन्होंने ताइवान के साथ संसदीय स्तर पर होने वाले आदान-प्रदान को चेक विदेश नीति का वैध और महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

विस्ट्रचिल ने चीन को और भी बहुत कुछ सुनाया

विस्ट्रचिल ने यह भी खुलासा किया कि ताइवान यात्रा से पहले उन्होंने सीनेट के अन्य सदस्यों से ताइवान के साथ संबंध मजबूत करने पर चर्चा की थी और 80 प्रतिशत से अधिक सांसदों ने इस पहल का समर्थन किया। चेक सरकार के कुछ सदस्यों द्वारा जताई गई चिंताओं पर उन्होंने कहा कि ताइवान और चेक गणराज्य के बीच सहयोग दोनों पक्षों के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से लाभदायक है। विस्ट्रचिल ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक देशों को अपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का फैसला किसी अधिनायकवादी दबाव के आधार पर नहीं करना चाहिए।

ताइवान ने चेक रिपब्लिक को कहा धन्यवाद

वहीं, ताइवान की संसद के अध्यक्ष हान कुओ-यू ने चेक नेता के समर्थन का स्वागत किया और कहा कि औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं होने के बावजूद चेक गणराज्य लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ताइवान का समर्थन करता रहा है। हान ने बताया कि अगस्त से ताइपे और प्राग के बीच अतिरिक्त सीधी उड़ानें शुरू होने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम दोनों पक्षों के बीच व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और लोगों के आपसी संपर्क को और मजबूत करेगा। उन्होंने इसे ताइवान और चेक गणराज्य के बीच लगातार बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण संकेत बताया।

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