फ्रांस, स्पेन, अल्बानिया के बाद यूरोप के एक और देश ग्रीस में भी प्रोटस्ट शुरू हो गए हैं। ग्रीस के कई शहरों में लोगों ने भी महंगाई, रोजी-रोटी के संकट और महंगे ईंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए हैं। सबसे बड़ा प्रोटेस्ट मार्च ग्रीस की राजधानी एथेंस में हुआ, जहां हजारों लोगों ने सरकार विरोधी मार्च निकाला। हालांकि, वहां अभी प्रोटेस्ट में हिंसा नहीं हुई है।
नए विरोध प्रदर्शनों से निपटने की तैयारी में जुटी फ्रांस सरकार
लेकिन, फ्रांस में कर्फ्यू के बावजूद, तमाम शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और लेबर यूनियंस ने शनिवार को पूरे देश में प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया है। इस बीच, फ्रांस के प्रधानमंत्री ने कहा है कि उनकी सरकार नए विरोध प्रदर्शनों से निपटने की तैयारी में अभी से जुट गई है। उधर, फ्रांस के पड़ोसी देश इटली में प्रोटेस्ट के दौरान हिंसा और लूट-पाट से निपटने के लिए जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने नया ऑर्डिनेंस जारी किया है। नए सिक्योरिटी नियमों के मुताबिक, नाबालिगों के किए नुकसान की भरपाई उनके माता-पिता से वसूली जाएगी।
इटली में लाए गए प्रदर्शनकारियों से निपटने के कड़े प्रावधान
इसके अलावा, इटली में प्रिवेंटिव डिटेंशन अब नाबलिगों पर भी लागू होगा यानी 16 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों पर केस चलाना आसान होगा। नकाबपोश उपद्रवियों की पहचान के लिए AI की मदद ली जाएगी। नए नियम के तहत हिंसक प्रोटेस्ट को अलग अपराध बनाया गया है। ऐसे जुर्म करने वालों को 5 साल तक की जेल और 20 हजार यूरो तक जुर्माना लग सकता है और अगर अपराधी चेहरा ढक लेते या किसी को चोट पहुंचाते हैं तो उनकी सजा और बढ़ सकती है। सरकार ने मिलान में सुरक्षा बढ़ाने के लिए साल के आखिर तक 500 एडिशनल सैनिकों की तैनाती का भी फैसला किया है।
हिंसा को नहीं स्वीकारा जा सकता है- मेलोनी
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि जिस तरह से हिंसा की गई, सुरक्षाबलों पर हमले किए गए, उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे हिंसक उपद्रवियों से निपटने के लिए सरकार नए नियम लेकर आई है, जिसमें 5 साल की जेल और 20 हजार यूरो तक जुर्माना है। अगर कोई नाबालिग हिंसा में शामिल होगा तो उस पर भी केस चल सकेगा और नुकसान की भरपाई उनके पेरेंट्स से होगी। इससे पहले, हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा था कि जिसने तोड़फोड़ की उसे कीमत चुकानी होगी।