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ट्रंप की मनमानी! फीफा वर्ल्ड कप, नाटो, ब्रिक्स, ईरान.. ये है खुलेआम धमकियों का पूरा चिट्ठा

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jul 06, 2026 09:29 pm IST,  Updated : Jul 06, 2026 09:43 pm IST

डोनाल्ड ट्रंप की दुनिया के मंच पर हनक और मनमानी के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं। सत्ता संभालने के बाद से ही हर दूसरे दिन किसी न किसी देश को चेतावनी देने वाले ट्रंप ने अब फीफा वर्ल्ड कप में भी धौंस जमाकर अपनी बात मनवाने की कोशिश की है।

डोनाल्ड ट्ंप- India TV Hindi
डोनाल्ड ट्ंप Image Source : AP

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के मुखिया हैं लेकिन उनका शासन और उनकी शैली अक्सर कूटनीतिक मर्यादाओं को तार-तार करती हुई हनक और मनमानी तक पहुंच जाती है। हर दूसरे दिन किसी देश या संस्थान को धमकी देना उनकी आदत में शुमार हो गया है। अब तक बिजनेस और युद्ध को लेकर धमकियां देने वाले ट्रंप ने फीफा वर्ल्ड कप में धौंस जमाकर अपनी बात मनवा ली जिसका पूरे यूरोप में कड़ा विरोध हो रहा है।

दरअसल, ट्रंप की यह कार्यशैली रही है कि शुरुआत में ही सामने वाले पर इतना दबाव बना दो कि वह बैकफुट पर आ जाए। आइए जानते हैं कि ट्रंप ने कब-कब, कहां और किसको अपनी धमकियों के निशाने पर लिया है।

फीफा वर्ल्ड कप में दखल

सबसे पहले फीफा वर्ल्ड कप में डोनाल्ड ट्रंप के दखल की बात करते हैं। ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद फीफा ने अमेरिका के स्टार फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन को मिला रेड कार्ड वापस ले लिया है जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ वर्ल्ड कप मैच खेल पाएंगे। दरअसल, अमेरिका ने राउंड ऑफ-32 मुकाबले में बोस्निया और हर्जेगोविना को 2-0 से हरा दिया था। इस मैच के 64 वें मिनट में फोलारिन बालोगुन को रेड कार्ड दिखाया गया था। फीफा के नियमों के मुताबिक रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी अगला मैच नहीं खेल सकता है। लेकिन अचानक फीफा की अनुशासन समिति ने इस फैसले को बदल दिया। यानी बालोगुन वर्ल्ड कप खेलते रहेंगे और प्रतिबंध टूर्नामेंट के बाद लागू होगा। बताया जा रहा है कि इस फैसले के पीछे डोनाल्ड ट्रंप की सीधी दखल रही। उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात की ओर पूरा मामला पलट गया। वहीं यूरोपीय फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था UEFA इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।

चाहें तो एक बार में सबको खत्म कर सकते हैं

ईरान युद्ध के दौरान अक्सर डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों में या फिर सोशल मीडिया पर धमकियां देते नजर आए। अभी जब ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई के जनाजे में लाखों की भीड़ जुटी, तो ट्रंप ने विवादित बयान देते हुए कहा कि "हम चाहें तो एक बार में सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन फिर वार्ता के लिए कौन बचेगा?" ईरानियों को खामेनेई के जनाजे में  रोता देख ट्रंप ने हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता था कि लोग खामेनेई से "नफरत" करते थे। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा, "शायद ये नकली आंसू हैं।" 

आज रात एक सभ्यता की मौत होने जा रही है

ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप ने उसके पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को मटियामेट कर देने का ऐलान किया था। इतना ही नहीं ट्रंप ने सीजफायर के लिए ईरान को डेडलाइन दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान नहीं मानता है तो वो उसे तबाह कर देंगे। अब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा है कि आज रात एक सभ्यता की मौत होने जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- "आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी, जिसे दोबारा कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन संभवतः ऐसा होगा। श्वर ईरान के महान लोगों की रक्षा करे!"

नाटो को चेतावनी: 'ग्रीनलैंड याद रखो'

डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के सहयोगी देशों को भी धमकी दी। उन्होंने ईरान युद्ध के दौरान  साफ कहा, "NATO हमारे काम नहीं आया जब हमें उनकी जरूरत थी, और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी तो वे तब भी नहीं होंगे।" इसके साथ ही ट्रंप ने कहा, 'ग्रीनलैंड याद रखो!'। इससे पहले भी वे यूरोपीय देशों को कह चुके हैं कि अगर उन्होंने अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत रक्षा पर खर्च नहीं किया, तो अमेरिका उनकी रक्षा नहीं करेगा।  वे रूस को उनके साथ "जो चाहे करने" के लिए खुली छूट दे देंगे।

इससे पहले देर हो जाए, समझौता कर लो

डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को भी धमकी दी। उन्होंने क्यूबा से समझौता करने की बात कही। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल एक पोस्ट ने ऐलान किया है कि अब क्यूबा को कोई तेल या पैसा नहीं मिलेगा। उन्होंने लिखा कि क्यूबा लंबे अर्से से वेनेजुएला के तेल और वित्तीय सहायता पर निर्भर था लेकिन अब हालात बदल गए हैं। ट्रंप ने क्यूबा के नेताओं को धमकाते हुए कहा है कि अभी वक्त है, इससे पहले कि देर हो जाए समझौता कर लो।

Donald Trump
Image Source : PTIडोनाल्ड ट्रंप

BRICS और भारत पर 'टैरिफ बम'

दूसरी बार सत्ता संभालते ही डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापारिक मोर्चे पर खलबली मचा दी। उन्होंने BRICS देशों को खुली धमकी देते हुए कहा कि अगर इसमें शामिल देश अमेरिका के विरोध में कोई पॉलिसी लाते हैं, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें। ट्रंप ने भारत और चीन समेत 11 देशों पर भारी टैरिफ लगा दिया। भारत के बारे में ट्रंप ने कहा कि परंपरागत रूप से भारत दुनिया के सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है और वहां व्यापार करना बेहद मुश्किल है। इसके अलावा उन्होंने मेक्सिको और कनाडा पर भी टैरिफ लगाने का ऐलान किया।

किम जोंग को कहा 'लिटिल रॉकेट मैन'

अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2017 में डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन के बीच का विवाद इतिहास में दर्ज है। ट्रंप ने उत्तर कोरिया को इतिहास की सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उसने अमेरिका को डराया, तो उसे ऐसे "फायर एंड फ्यूरी" (आग और गुस्से) का सामना करना पड़ेगा जिसे दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा। उन्होंने किम जोंग उन को सार्वजनिक मंचों से उन्होंने 'लिटिल रॉकेट मैन' भी पुकारा था।

H-1B वीजा

खुद अमेरिका के अंदर भी घरेलू मोर्चे पर वे मनमानी करते रहे हैं। H-1B वीजा पर उन्होंने जो फैसला लिया उसके कारण उनकी खूब किरकिरी हुई। अमेरिका के एक फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया जिसके तहत नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर एक लाख डॉलर (करीब ₹85 लाख) का भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव था। अदालत ने इसे पूरी तरह असंवैधानिक और एक 'अवैध टैक्स' करार दिया। इस तरह से उनके मनमाने फैसलों पर अमेरिका की अदालत ने ब्रेक लगा दिया।

बर्थ राइट सिटिजनशिप

इसी तरह बर्थ राइट सिटिजनशिप पर भी डोनाल्ड ट्रंप ने मनमानी की। लेकिन अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने के व्यापक सिद्धांत को बरकरार रखा है। कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जो लोग अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी तौर पर रह रहे हैं, उनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी यानी जन्मजात नागरिकता नहीं मिलेगी। जजों ने  यह फैसला सुनाया कि देश में पैदा होने वाला कोई भी व्यक्ति (कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर) देश का नागरिक है।

तीसरी दुनिया के देशों को धमकी

नवंबर 2025 में व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड के दो सैनिकों पर गोलीबारी की घटना हुई। इसमें एक की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हमले को एक अफगान नागरिक ने अंजाम दिया था। इसके बाद ट्रंप ने ऐलान किया कि वह तीसरी दुनिया के देशों से लोगों को अमेरिका नहीं आने देंगे।

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