अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि जो भी देश अमेरिकी कंपनियों की डिजिटल सेवाओं पर टैक्स लगाएगा, उसे अमेरिका को किए जाने वाले एक्सपोर्ट पर 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब कई यूरोपीय देश बड़ी अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर नए डिजिटल सर्विस टैक्स लगाने पर विचार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स लगाने के यूरोपीय देशों के "जल्द होने वाले" कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो देश ऐसे कदम उठाएंगे, उनसे इम्पोर्ट होने वाले सामान पर वॉशिंगटन तुरंत भारी टैरिफ लगाकर जवाब देगा।
ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
अपनी बात साफ करते हुए ट्रंप ने ट्रुथसोशल पर लिखा, "इस बयान को ऐसे समझा जाए कि जो भी देश ऐसा टैक्स लगाएगा, उसे तुरंत ही अमेरिका भेजे जाने वाले सभी सामानों पर 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित टैरिफ पॉलिसी पहले से तय किसी भी ट्रेड एग्रीमेंट से ऊपर होगी। ट्रंप के मुताबिक, यह नियम ऐसे डिजिटल टैक्स लागू करने वाले हर देश पर लागू होगा, हालांकि उनकी बात खास तौर पर यूरोपीय देशों पर केंद्रित थी।

डिजिटल टैक्स विवाद से नए ट्रेड टेंशन का खतरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की हालिया चेतावनी से अमेरिका और यूरोप के बीच फिर से ट्रेड टेंशन बढ़ने की संभावना है। कई देश डिजिटल सर्विस टैक्स लगाने पर विचार कर रहे हैं ताकि यह पक्का किया जा सके कि मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनियां उन बाजारों में टैक्स दें जहां से वे काफी कमाई करती हैं। यह मुद्दा वाशिंगटन और कई यूरोपीय सरकारों के बीच असहमति का एक बड़ा कारण रहा है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि ऐसे टैक्स खास तौर पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों को निशाना बनाते हैं।
डिजिटल सर्विस टैक्स विवादित क्यों हैं?
डिजिटल सर्विस टैक्स आम तौर पर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा किसी देश के भीतर ऑनलाइन विज्ञापन, डिजिटल मार्केटप्लेस और इंटरनेट-आधारित अन्य सेवाओं से होने वाली कमाई पर लगाया जाता है। ये टैक्स आमतौर पर इस तरह से बनाए जाते हैं कि ये केवल दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे स्थापित टेक कंपनियों- जैसे मेटा, अल्फाबेट और अमेज़न पर लागू हों, जो अमेरिकी कंपनियां हैं। अमेरिका लगातार इन टैक्स का विरोध करता रहा है और उसका कहना है कि इनसे अमेरिकी कंपनियों पर गलत असर पड़ता है। दूसरी ओर, कई देशों का तर्क है कि मौजूदा इंटरनेशनल टैक्स नियम डिजिटल इकॉनमी के साथ तालमेल नहीं बैठा पाए हैं और सही टैक्स व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उन्हें अपडेट करने की जरूरत है।
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