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शिकागो में विश्व धर्म संसद का उद्घाटन, जैन आचार्य लोकेश मुनि ने दिया संबोधन

 Edited By: Subhash Kumar
 Published : Aug 15, 2023 06:52 pm IST,  Updated : Aug 15, 2023 06:59 pm IST

जैन आचार्य लोकेश मुनी ने अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित विश्व धर्म संसद में 80 देशों के प्रतिनिधियों के बीच भारत का झंडा भी फहराया।

 Jain Acharya Lokesh Muni- India TV Hindi
जैन आचार्य लोकेश मुनी। Image Source : X (@MUNILOKESH)

अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म संसद 2023 का उद्घाटन किया गया। इस समारोह में 80 से अधिक देशों के दस हजार से अधिक विविध धर्मों और संप्रदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उद्घाटन समारोह का संबोधन अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य डॉ. आचार्य लोकेश मुनि ने किया। समारोह में दुनियाभर के प्रतिनिधियों के साथ धार्मिक सद्भाव, आध्यात्मिक उत्थान, जलवायु परिवर्तन, अहिंसक समाज और अन्य विषयों पर चर्चा की गई।

18 अगस्त तक चलेगी संसद 

विश्व धर्म संसद 2023 का आयोजन 14 अगस्त से लेकर 18 अगस्त 2023 तक किया जा रहा है। यहां जैन संत डॉ. आचार्य लोकेश विश्व शांति स्थापित करने के तरीके, शांति और प्रेम: हिंसा-मुक्त, घृणा मुक्त और युद्ध मुक्त विश्व जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे। 

भारत का प्रतिनिधित्व गर्व की बात
इस मौके पर आचार्य लोकेश ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर जैन धर्म और भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है। बता दें कि स्वामी विवेकानन्द ने भी 1893 में शिकागो में इसी विश्व धर्म संसद को संबोधित किया था और दुनिया का ध्यान भारत की आध्यात्मिक विरासत की ओर खींचा था। इससे पहले आचार्य लोकेश ने 2015 में अमेरिका के साल्ट लेक सिटी और 2018 में टोरंटो में आयोजित विश्व धर्म संसद के उद्घाटन समारोह को भी संबोधित किया था।

वैश्विक चुनौतियों का हो समाधान
जैन आचार्य लोकेश ने समारोह में उपस्थित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से प्रेम, शांति और समृद्धि की दिशा में एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि विश्व इस वक्त अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें से कुछ तो पूरी सृष्टि के लिए खतरा बनी हुई हैं। ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और हिंसा ऐसे मुद्दे हैं जिनसे हर कोई जूझ रहा है। विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, देशों और विचारधाराओं के लोग एक साथ आकर इन समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिए सर्वधर्म सद्भाव आवश्यक है।

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