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भारत के साथ मजबूत हुए अमेरिका के रक्षा संबंध, पाकिस्तान के साथ बैलिस्टिक मिसाइल को लेकर तनातनी

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Dec 20, 2024 09:49 am IST,  Updated : Dec 20, 2024 09:49 am IST

पेंटागन का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध शानदार तरीके से और मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, व्हाइट हाउस ने कहा है कि पाकिस्तान का बैलिस्टिक-मिसाइल कार्यक्रम उभरता हुआ खतरा है।

PM Narendra Modi and American President Joe Biden- India TV Hindi
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन Image Source : PTI

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध शानदार तरीके से और मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। पेटागन का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब सत्ता की बागडोर राष्ट्रपति जो बाइडन के हाथों से नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास आने वाली है। हिंद-प्रशांत सुरक्षा मामलों के लिए सहायक रक्षा मंत्री एली रैटनर ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अमेरिका-भारत रक्षा संबंध मजबूत हैं। ये संबंध रक्षा औद्योगिक आधार सहयोग के साथ ही सेवाओं में अभियानगत सहयोग से जुड़े हैं और शानदार तरीकों से तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।’’ 

एक सवाल के जवाब में रैटनर ने कहा, ‘‘भारत-चीन संबंधों में उतार-चढ़ाव है, लेकिन भारत-अमेरिका रक्षा संबंध निरंतर आगे बढ़ रहे है।’’ अमेरिका भारत को अपना प्रमुख रक्षा साझेदार मानता है। बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने रक्षा संबंधों को इस साझेदारी के प्रमुख स्तंभों में से एक बताया है। 

पाकिस्तान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम उभरता हुआ खतरा

व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान द्वारा अत्याधुनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी विकसित करने से उसे अमेरिका सहित दक्षिण एशिया से बाहर हमला करने की क्षमता मिलेगी। उन्होंने कहा कि एशियाई देश की कार्रवाई अमेरिका के लिए एक उभरता हुआ खतरा है। व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारी की यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा चार पाकिस्तानी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने के एक दिन बाद आई है, जिसमें सरकारी स्वामित्व वाली प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा एजेंसी नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (एनडीसी) शामिल हैं। 

इन संस्थाओं पर लगाया बैन

इन संस्थाओं पर पाकिस्तान के बैलिस्टिक-मिसाइल कार्यक्रम में योगदान देने का आरोप है। अन्य तीन संस्थाएं अख्तर एंड संस प्राइवेट लिमिटेड, एफिलिएट्स इंटरनेशनल और रॉकसाइड एंटरप्राइज हैं। ये तीनों कराची में स्थित हैं और इस्लामाबाद में एनडीसी बैलिस्टिक-मिसाइल कार्यक्रम के लिए जिम्मेदार है। इसने पाकिस्तान के लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए वस्तुओं को हासिल करने का काम किया है।

बाइडन सरकार ने तीन चरण के प्रतिबंध लगाए

प्रधान उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फाइनर ने एक थिंक-टैंक को बताया "बाइडन प्रशासन ने लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के आगे के विकास से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। पिछले साल हमने पाकिस्तान के बैलिस्टिक-मिसाइल कार्यक्रम को समर्थन प्रदान करने वाली गैर-पाकिस्तानी संस्थाओं पर तीन दौर के प्रतिबंध लगाए हैं। कल, हमने पाकिस्तान के सरकारी स्वामित्व वाले राष्ट्रीय विकास परिसर के खिलाफ सीधे प्रतिबंध जारी किए, जिसके बारे में संयुक्त राज्य अमेरिका का आकलन है कि वह पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और उत्पादन में शामिल है, पहली बार हमने मिसाइल विकास से जुड़े किसी पाकिस्तानी सरकारी स्वामित्व वाले उद्यम पर प्रतिबंध लगाया है।" 

पाकिस्तान पर बना रहेगा दबाव

फाइनर ने एक शीर्ष अमेरिकी थिंक-टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में अपनी टिप्पणी में कहा "सरल शब्दों में कहें तो, हम पाकिस्तान पर उसके लंबी दूरी के मिसाइल कार्यक्रम के संबंध में दबाव बनाए रखेंगे, साथ ही हम अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए कूटनीतिक समाधान की तलाश भी जारी रखेंगे।" हाल ही में अपनी टिप्पणी में, फाइनर ने कहा कि पाकिस्तान ने लगातार मिसाइल प्रौद्योगिकी विकसित की है। उसने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर ऐसे उपकरण बनाए हैं, जो काफी बड़े रॉकेट मोटर्स के परीक्षण को सक्षम करेंगे। यदि ये प्रवृत्तियां जारी रहती हैं, तो पाकिस्तान के पास संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दक्षिण एशिया से परे लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता होगी, जिससे पाकिस्तान के इरादों पर वास्तविक प्रश्न उठेंगे।"

अमेरिका पर तीन देश ही कर सकते हैं मिसाइल हमला

फाइनर ने कहा कि परमाणु हथियार और सीधे अमेरिका तक पहुंचने की मिसाइल क्षमता रखने वाले देशों की सूची बहुत छोटी है (रूस, उत्तर कोरिया और चीन) और वे संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति प्रतिकूल हैं। फाइनर ने कहा, "हम विकास, आतंकवाद-रोधी और अन्य सुरक्षा मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ लंबे समय से साझेदार रहे हैं, जिनमें काफी संवेदनशील मुद्दे भी शामिल हैं। हमने मुश्किल समय में इस्लामाबाद को सहायता प्रदान की है और हम साझा हितों के इन क्षेत्रों में सहयोगात्मक संबंध चाहते हैं। इससे हमें और भी अधिक संदेह होता है कि पाकिस्तान ऐसी क्षमता विकसित करने के लिए क्यों प्रेरित होगा जिसका इस्तेमाल हमारे खिलाफ किया जा सकता है। दुर्भाग्य से, हमारा मानना ​​है कि पाकिस्तान इन चिंताओं और, स्पष्ट रूप से, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अन्य लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने में विफल रहा है और इन क्षमताओं को आगे बढ़ाना जारी रखा है।"

बड़ा खतरा बन सकता है पाकिस्तान

फाइनर ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा "केवल मानचित्र और सीमाओं को देखते हुए, हम मानते हैं कि यह मूल रूप से हम पर केंद्रित है। मुझे लगता है कि हमें जो जानकारी मिली है उसके आधार पर यही नतीजा निकलता है और यही कारण है कि यह इतनी बड़ी चिंता का विषय है। क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका चुपचाप बैठकर इस क्षमता के विकास को नहीं देख सकता है, जो हमें लगता है कि अंततः भविष्य में खतरा पैदा कर सकता है।" (इनपुट- पीटीआई)

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