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UN ने भारतीय शांतिरक्षक को मरणोपरांत किया सम्मानित, कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दी थी जान

 Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : May 31, 2024 08:33 am IST,  Updated : May 31, 2024 08:36 am IST

संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को सेवा के दौरान कर्तव्य निर्वहन करते हुए अपनी जान गंवाने वाले भारत के शांतिरक्षक धनंजय कुमार सिंह को प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया।

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यूएन महासचिव एंतोनियो गुतारेस से पदक प्राप्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज। Image Source : X.COM/RUCHIRAKAMBOJ

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र के तहत सेवा देने के दौरान अपनी जान गंवाने वाले भारतीय शांतिरक्षक नायक धनंजय कुमार सिंह को अपने कर्तव्य को निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान के लिए गुरुवार को मरणोपरांत प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया। धनंजय के अलावा कर्तव्य पालन करते हुए जान गंवाने वाले 60 से ज्यादा सैन्य, पुलिस और नागरिक शांतिक्षकों को भी संयुक्त राष्ट्र पदक दिया गया। इसी अवसर पर भारतीय शांतिरक्षक मेजर राधिका सेन को ‘2023 यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ प्रदान किया गया।

रुचिरा कंबोज ने प्राप्त किया सिंह का पदक

नायक धनंजय कुमार सिंह ने ‘यूनाइटेड नेशन्स ऑर्गेनाइजेशन स्टैबिलाइजेशन मिशन इन द डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो’ (MONUSCO) के तहत काम किया था। उन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह के दौरान मरणोपरांत ‘डैग हैमरस्कजॉल्ड’ पदक से सम्मानित किया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने यूएन महासचिव एंतोनियो गुतारेस से यह पदक प्राप्त किया। MONUSCO में सेवा दे चुकीं मेजर सेन को भी UN हेडक्वॉर्टर में आयोजित कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने प्रतिष्ठित ‘2023 यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड’ से सम्मानित किया।

8 साल पहले सेना में भर्ती हुई थीं मेजर सेन

वर्ष 2016 में स्थापित यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवार्ड शांति और सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 के सिद्धांतों को बढ़ावा देने में शांतिरक्षक के समर्पण और प्रयासों को मान्यता देता है। मेजर राधिका सेन, मेजर सुमन गवानी के बाद इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को पाने वाली दूसरी भारतीय शांति रक्षक हैं। मेजर गवानी ने दक्षिणी सूडान में संयुक्त राष्ट्र के मिशन में सेवा दी थी और उन्हें 2019 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हिमाचल प्रदेश में 1993 में जन्मी मेजर सेन 8 साल पहले भारतीय सेना में भर्ती हुईं। उन्होंने बायोटेक इंजीनियर के तौर पर स्नातक किया। जब उन्होंने सेना में शामिल होने का फैसला किया था, उस समय वह IIT बॉम्बे से परास्नातक की पढ़ाई कर रही थीं।

180 शांतिरक्षक दे चुके हैं सर्वोच्च बलिदान

अभी संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने वाली महिला सैन्य शांतिरक्षकों में भारत का 11वां सबसे बड़ा योगदान है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में वर्दीधारी कार्मिकों का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। वर्तमान में भारत के 6000 से अधिक सैन्य एवं पुलिस कर्मी अबेई, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, साइप्रस, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, लेबनान, पश्चिम एशिया, सोमालिया, दक्षिण सूडान और पश्चिमी सहारा में संयुक्त राष्ट्र अभियानों के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हैं। करीब 180 भारतीय शांतिरक्षकों ने अपने कर्तव्य का निर्वाहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है, जो सैन्य योगदान देने वाले किसी भी देश की सर्वाधिक संख्या है।

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