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अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने दिया ट्रंप के पक्ष में बड़ा फैसला, जानें जन्म सिद्ध नागरिकता का क्या होगा?

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Jun 27, 2025 11:12 pm IST,  Updated : Jun 27, 2025 11:12 pm IST

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है। देश की विभिन्न अदालतों में ट्रंप के फैसलों पर स्टे लगाने या उसे रद्द करने वाले न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जजों को पूरे देश में लागू होने वाले फैसलों पर आदेश देने का अधिकार नहीं है।

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट। - India TV Hindi
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट। Image Source : AP

वाशिंगटन: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम निर्णय देते हुए कहा कि किसी एक न्यायाधीश के पास पूरे देश के लिए आदेश देने का अधिकार नहीं है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक जीत मानी जा रही है, जो लंबे समय से अपने एजेंडे को एकल न्यायिक आदेशों द्वारा बाधित किए जाने की शिकायत करते रहे हैं।

जन्मजात नागरिकता पर क्या होगा असर

अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ट्रंप द्वारा "जन्मसिद्ध नागरिकता" (Birthright Citizenship) पर लगाई गई रोक पर उसके फैसले का क्या प्रभाव होगा। सुप्रीम कोर्ट के रूढ़िवादी बहुमत ने इस ओर इशारा किया कि ट्रंप का आदेश अब भी देशव्यापी प्रभाव में रोका जा सकता है, लेकिन उस पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।

क्या है विवाद?

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसके तहत ऐसे बच्चों को अमेरिकी नागरिकता देने से इनकार किया गया था, जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हैं। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि केवल वहीं बच्चे नागरिकता के पात्र हैं, जो अमेरिका के वैध नागरिकों या कानूनी स्थायी निवासियों के यहां जन्में हों।

अब तक क्या था नागरिकता का कानून

अमेरिकी गृह युद्ध के बाद 1868 में लागू संविधान का 14वां संशोधन कहता है कि “अमेरिका में जन्मा और इसके अधिकार क्षेत्र के अधीन कोई भी व्यक्ति अमेरिकी नागरिक है।” यही प्रावधान जन्मसिद्ध नागरिकता का आधार है। वर्तमान में अमेरिका उन 30 देशों में शामिल है, जहां जन्म के आधार पर नागरिकता दी जाती है। इसमें कनाडा और मैक्सिको जैसे पड़ोसी देश भी शामिल हैं।

ट्रंप की दलील

ट्रंप और उनके समर्थकों का कहना है कि जन्मसिद्ध नागरिकता का सिद्धांत अवैध प्रवासन को बढ़ावा देता है और इसे सीमित करने की आवश्यकता है। उन्होंने इसे "एक अमूल्य और गहरा उपहार" बताया, जो हर किसी को नहीं मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं और जो "अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में" नहीं आते, वे संविधान के इस संशोधन के तहत नागरिकता के हकदार नहीं हैं।

कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि कोई भी संघीय जिला न्यायाधीश अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर देशभर में आदेश लागू नहीं कर सकता। इसका मतलब यह है कि कोई भी न्यायिक आदेश, जो देशव्यापी प्रभाव डालता है, उस पर अब पुनर्विचार हो सकता है। हालांकि यह संवैधानिक अधिकारों की व्याख्या को समाप्त नहीं करता, लेकिन ट्रंप जैसे नेताओं को यह निर्णय राहत देता है कि उनकी नीतियों को एक ही न्यायालय द्वारा देशभर में रोके जाने की संभावना कम होगी।

अब आगे क्या?

अब यह मामला अगली न्यायिक प्रक्रियाओं और संविधान की व्याख्या के आधार पर आगे बढ़ेगा। यह देखा जाएगा कि क्या "अधिकार क्षेत्र के अधीन" वाक्यांश का उपयोग अवैध प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता से वंचित करने के लिए किया जा सकता है या नहीं। यह फैसला न केवल अमेरिका की नागरिकता नीति पर गहरा प्रभाव डालेगा, बल्कि न्यायिक अधिकारों की सीमा को भी परिभाषित करेगा। अमेरिकी राजनीति और संविधानिक बहस में यह फैसला लंबे समय तक चर्चित रहने वाला है। (एपी)

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