सासारामः बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर 2025 को होगा और 14 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे। चुनाव के तारीख की घोषणा होने से पहले ही चुनावी राजनीति गरमा गई है। सासाराम में राजनीतिक दलों की तरफ से इलाके में चुनावी कार्यक्रम किए जा रहे हैं और संभावित उम्मीदवार भी अपनी संभावनाएं तलाशने में जुट गए हैं।
सासाराम के बारे में जानें
सासाराम का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है। किसी जमाने में सासाराम सूर वंश की राजधानी हुआ करता था। सासाराम बिहार के रोहतास जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। सासाराम की साक्षरता दर 80 फीसदी से ज्यादा है। सासाराम जनरल सीट है। 1980 से 2015 तक 45 वर्षों तक केवल कुशवाहा समुदाय के ही नेता चुने गए और दूसरे स्थान पर आने वाले उम्मीदवार भी अक्सर उसी जाति के होते हैं।
2020 में आरजेडी ने दर्ज की थी जीत
सासाराम विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव 2020 में आरजेडी ने जीत दर्ज की थी। आरजेडी के राजेश कुमार गुप्ता ने जेडीयू के अशोक कुमार को 26423 मतों के अंतर से हराकर यह सीट जीती थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सासाराम संसदीय सीट से जीत दर्ज की थी।
सासाराम का चुनावी इतिहास
साल 1957 में निर्वाचन क्षेत्र बनने के बाद से सासाराम में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा बीजेपी ने पांच बार जीत दर्ज की है। कांग्रेस को सिर्फ दो बार जीत मिली है। अपने सुनहरे दिनों में भी सासाराम कभी कांग्रेस का गढ़ नहीं रहा। हाल के वर्षों में यह सीट बीजेपी और आरजेडी के बीच एक रणक्षेत्र के रूप में उभरी है। भाजपा की जीत की हैट्रिक के बाद आरजेडी ने लगातार दो बार यह सीट जीती, जिससे भाजपा को 2020 के चुनावों में यह सीट अपने सहयोगी जेडीयू को देनी पड़ी। साल 2020, 2015 में इस सीट पर आरजेडी ने जीत दर्ज की। 2010 और 2005 में बीजेपी ने जीत दर्ज की। 2000 में आरजेडी, 1995, 1990 में बीजेपी को जीत हासिल हुई थी।
इस बार कड़ा हो सकता है मुकाबला
सासाराम में बेशक आरजेडी का कब्जा है लेकिन आंकड़ों में देखें तो बीजेपी का पलड़ा भारी रहा है। 2020 में जेडीयू के निराशाजनक प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि भाजपा इस बार राजद को सीधी चुनौती देने और उसकी जीत की संभावित हैट्रिक को रोकने के लिए अपना उम्मीदवार उतारने पर विचार कर सकती है। इस बार प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी चुनावी मैदान में उतर रही है।