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नीतीश को भारी पड़ रहा वक्फ बिल का समर्थन, 5 नेताओं के बाद 20 से ज्यादा मुस्लिम पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Apr 05, 2025 09:31 am IST,  Updated : Apr 05, 2025 02:47 pm IST

जेडीयू के कई नेता पहले ही पार्टी से किनारा कर चुके हैं। अब कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी पार्टी छोड़ रहे हैं। इसका नुकसान नीतीश कुमार को आगामी बिहार चुनाव में हो सकता है।

Nitish Kumar- India TV Hindi
नीतीश कुमार Image Source : PTI

संसद के दोनों सदनों में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) में इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है। जेडीयू के सांसदों ने सदन में वक्फ बिल का समर्थन किया था। इसके विरोध में शुक्रवार तक पांच बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। इसके बाद 20 से ज्यादा मुस्लिम पदाधिकारियों ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। इस्तीफा देने वाले नेताओं में नदीम अख्तर, राजू नैय्यर, तबरेज सिद्दीकी अलीग, मोहम्मद शाहनवाज मलिक और मोहम्मद कासिम अंसारी शामिल हैं।

बिहार में कुछ महीने बाद ही विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह पार्टी के लिए चिंता का विषय है। जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी को आने वाले समय में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने क्या कहा?

राजू नैयर ने अपने त्यागपत्र में कहा कि वह जेडी(यू) द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करने से "बहुत आहत" हैं और उन्होंने इसे मुसलमानों पर अत्याचार करने वाला "काला कानून" कहा। उन्होंने कहा, "वक्फ संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित होने और समर्थन मिलने के बाद मैं जेडी(यू) से इस्तीफा देता हूं," और सभी पार्टी जिम्मेदारियों से मुक्त होने का अनुरोध किया। तबरेज हसन ने शुक्रवार को जेडी(यू) प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संबोधित अपने त्यागपत्र में कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के लिए पार्टी के समर्थन ने मुसलमानों का विश्वास तोड़ दिया है, जो मानते थे कि यह धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए खड़ा है।

तबरेज बोले- धर्मनिरपेक्ष छवि नहीं बचा पाए नीतीश

तबरेज ने एक पत्र में लिखा, "मुझे उम्मीद थी कि आप अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को बरकरार रखेंगे, लेकिन इसके बजाय, आपने उन लोगों का पक्ष लिया जिन्होंने लगातार मुसलमानों के हितों के खिलाफ काम किया है।" ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने भाजपा के सहयोगियों और सांसदों सहित सभी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों से वक्फ संशोधन विधेयक को अस्वीकार करने का आह्वान किया था।

औरंगाबाद में 20 से ज्यादा मुस्लिम पदाधिकारियों ने छोड़ी पार्टी

वक्फ बिल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा समर्थन किए जाने पर शनिवार को औरंगाबाद जदयू के 20 से ज्यादा मुस्लिम पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। जदयू श्रम और तकनीकी प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष अफरीदी रहमान ने घर पर लगी पार्टी के नेम प्लेट को तोड़ते हुए समर्थकों के साथ नारेबाजी की। जदयू नेता अफरीदी रहमान ने अपने 20 से अधिक समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा देकर विरोध जताया। इस दौरान नीतीश कुमार मुर्दाबाद और नीतीश कुमार हाय हाय के नारे भी लगाए। वक्फ में संशोधन करना बंद करो के भी नारे लगाए। 

कानून बनने से एक कदम दूर है वक्फ बिल

बुधवार को लोकसभा में इस बिल पर बहस शुरू हुई थी और देर रात बिल सदन से पारित कर दिया गया। अगले दिन राज्यसभा में बिल पर लंबी बहस चली और यहां से भी इसे पारित कर दिया गया। अब इस बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने बाकी हैं। राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने बताया कि वक्फ (संशोधन) विधेयक के पक्ष में 128 सदस्यों ने मतदान किया जबकि 95 ने इसके खिलाफ मतदान किया। उन्होंने कहा कि अंतिम गणना में सुधार किया जा सकता है। इससे पहले गुरुवार को लोकसभा ने लंबी बहस के बाद विधेयक को पारित कर दिया। नरेंद्र मोदी सरकार ने इस विधेयक का पुरजोर बचाव किया है, जबकि विपक्ष ने इसे 'असंवैधानिक' और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए खतरा बताते हुए इसकी आलोचना की है।

(मुजफ्फरपुर से संजीव कुमार की रिपोर्ट)

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