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साइबर अपराधी कैसे करते हैं बैंक अकाउंट और सिम का जुगाड़? एक महिला की गिरफ्तारी से हुआ खुलासा-VIDEO

 Reported By: Nitish Chandra,  Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Sep 27, 2026 11:53 pm IST,  Updated : Sep 28, 2026 12:01 am IST

पुलिस ने बताया कि पटना जिले में पड़ने वाली कोंदी पंचायत में 50 साल की सीता देवी नाम की एक महिला ग्रामीणों के संपर्क में आई थी। उसने भोले-भाले ग्रामीणों का बैंक में खाता खुलवाया। यहीं से इस महिला का खेल शुरू हुआ।

आरोपी महिला और बरामद की किया गया माल- India TV Hindi
आरोपी महिला और बरामद की किया गया माल Image Source : REPORTER INPUT

बिहार की राजधानी पटना से 70 किलोमीटर दूर बाढ़ के सलेमपुर में सीता देवी नाम की एक महिला की गिरफ्तारी के बाद इस बात का खुलासा हुआ है कि साइबर अपराधी ठगी के जरिये लोगों के बैंक अकाउंट से चुराए पैसे को रखने और उसकी निकासी के लिए म्यूल एकाउंट्स और सिम का इंतजाम कैसे करते हैं। इस खुलासे से ये बात भी सामने आई है कि साइबर अपराधियों ने अब पंचायत प्रतिनिधियों, बैंककर्मियों और प्वाइंट ऑफ सेल एजेंटों को अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया है। मुखिया, सरपंच और वार्ड पार्षद उनका कमीशन एजेंट बन कर काम कर रहे हैं। 

हालिया कार्रवाई में इस गठजोड़ का खुलासा

साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई की हालिया कार्रवाई में इस गठजोड़ का खुलासा हुआ है। अपने रसूख और भरोसे का इस्तेमाल कर ये जनप्रतिनिधि सरकारी योजनाओं का झांसा देकर गरीबों की भीड़ जुटाते हैं, उनके दस्तावेज हासिल करते हैं और उनके नाम पर म्यूल खाते एवं सिम जारी करवा देते हैं। इन सिम का इस्तेमाल साइबर अपराधी लोगों को कॉल करने में करते हैं। इसके एवज में जनप्रतिनिधियों को प्रति म्यूल खाता 25 हजार से 35 हजार, जबकि प्रति सिम कार्ड 3 हजार से 5 हजार तक का कमीशन मिलता है। साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते या खाताधारक को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति की संदिग्ध या अवैध रकम प्राप्त करने, निकालने अथवा आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। 

सीता देवी नाम की एक महिला ग्रामीणों के संपर्क में आई

मामला ये है कि पटना जिले के बाढ़ के कोंदी पंचायत में 50 साल की सीता देवी नाम की एक महिला ग्रामीणों के संपर्क में आई। उसने सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की बात कहकर शिविर लगवाकर कई भोले भाले ग्रामीणों का केनरा बैंक और सेंट्रल बैंक में खाता खुलवाया। हर महीने 25 किलो अनाज मिलने का लालच भी गांव के लोगों को दिया गया। जब खाता खुल गया तो एटीएम कार्ड, पासबुक से लेकर वेलकम किट की सारी चीजे उसने अपने पास ही रख ली।

ग्रामीणों के आधार दस्तावेज लेकर उनके नाम पर सिम भी ले लिया गया और उन्हीं नंबरों से सेंट्रल बैंक तथा केनरा बैंक में सीएसपी के जरिए खाते खुलवाए गए। फिर ये बैंक अकाउंट और सिम साइबर अपराधियों को बेचे गए। शातिरों ने ग्रामीणों के दस्तावेज और खातों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर बैंकों से लोन भी ले लिया था। 

कुछ खातों में मध्य प्रदेश और हैदराबाद से आई संदिग्ध रकम 

शुरुआत में कुछ लोगों को अनाज दिया भी गया, जिससे ग्रामीणों का विश्वास कायम हुआ। बाद में अनाज मिलना बंद हो गया और खाताधारकों को अपने खातों में होने वाले लेन-देन की जानकारी भी नहीं रही। गांव में हड़कंप तब मचा, जब कुछ खातों में मध्य प्रदेश और हैदराबाद से संदिग्ध रकम आने की जानकारी सामने आई और पुलिस संबंधित खाताधारकों के घर पहुंची। खाताधारकों ने बताया कि उनको इन पैसों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद बड़ी संख्या में महिला और पुरुष खाताधारक बैंक पहुंच गए और अपने खाते बंद कराने की मांग करने लगे।

खातों में 15 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की रकम मंगाई गई

साइबर पुलिस की जांच में पता चला है कि बीते तीन सालों में करीब 500 ग्रामीणों के खातों में 15 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की रकम मंगाई गई। सीता जीविकी दीदी का काम करती है। इस मामले में गिरोह के अन्य बदमाश फरार हैं। उनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।  पुलिस ने सीता की निशानदेही पर गिरोह के सरगना सरपंच संतोष मुखिया और उसके साथी आजाद की तलाश में नालंदा में भी छापेमारी की लेकिन दोनों फरार हो गए। उनके ठिकानों से कई चीजें बरामद हुई हैं।

12 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, एक बायोमैट्रिक डिवाईस बरामद

साइबर DSP संगीता कुमारी ने बताया कि आरोपितों के घर से 12 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, एक बायोमैट्रिक डिवाईस, 2 पासबुक, दो एटीएम और एक चेक बुक बरामद किए गए हैं। वहीं, आजाद का मोबाइल फोन जब्त किया गया है। पुलिस दोनों के फोन का सीडीआर निकलवा रही है। उन्होंने बताया कि आजाद के पास से बरामद फोन में कई लोन कंपनी के एप मिले हैं। मामले की छानबीन जारी है।

मनी लॉन्ड्रिंग के लिए कुल 58,585 म्यूल अकाउंट चिन्हित

देश भर में होने वाले साइबर अपराध के लिए बिहार साइबर अपराधियों की पहली पसंद बन गया है। बिहार में 2026 में साइबर अपराधियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के लिए कुल 58,585 म्यूल अकाउंट चिन्हित किए गए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा 9543 अकाउंट पटना में, गया में 4,275 और नालंदा में 3,724 संदिग्ध खाते चिह्नित किए गए हैं। ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड और गेमिंग ऐप के अवैध पैसों को ठिकाने लगाने के लिए अपराधी भोले-भाले ग्रामीणों के बैंक खातों और दस्तावेजों का इस्तेमाल इन 'म्यूल अकाउंट' के रूप में कर रहे हैं।

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