बिहार के सुपौल जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। सुपौल जिले के प्रतापगंज थाने में कफ सिरप के हज़ारों बोतल की चोरी का मामला सामने आया है। चोरी का यह मामला सुपौल एसपी द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में उजागर हुआ। इसके बाद तत्काल प्रभाव से प्रतापगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया। वहीं, इसमें संलिप्त चार अन्य पुलिसकर्मियों चौकीदार राहुल कुमार, अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और अखिलेश कुमार को गिरफ्तार कर मंगलवार सुबह न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में अफरा तफरी का माहौल बन गया है।
जांच में हुआ खुलासा
जांच के लिए 7560 कफ सिरप बोतल जब्त की गयी थी लेकिन जाँच के दौरान केवल1390 बोतलें ही मिलीं। दरअसल, त्रिस्तरीय जांच के लिए आठ बोतल भेजे जाने के बाद मालखाने में 7560 बोतलें होनी चाहिए थीं, लेकिन जब जांच टीम पहुंची तो वहां केवल 1390 बोतल थी यानी लगभग 6162 बोतलें गायब थीं। गायब स्टॉक को छिपाने के लिए मालखाने में 2842 बोतलें ऐसी रखी गईं जो वर्ष 2026 में निर्मित थीं और जिनका ब्रांड तथा बैच नंबर जब्ती सूची से पूरी तरह अलग था।
जांच में और भी कई चीजन आईं सामने
मामले की गुप्त शिकायत डीजीपी तक पहुंची तो सुपौल एसपी शरथ आरएस ने पुलिस उपाधीक्षक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति में वीरपुर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार और साइबर डीएसपी गौरव गुप्ता शामिल थे। बीते 11 जून को सौंपी गई रिपोर्ट ने पूरे पुलिस महकमे में भूचाल ला दिया। जांच में सामने आया कि थाना परिसर से जब्त ट्रैक्टर का डायनमो, टायर और बैटरी तक गायब कर बेच दिए गए। इतना ही नहीं, लूटकांड से जुड़ी एक अपाचे बाइक को थाना लाने के बावजूद छोड़ देने का मामला भी सामने आया।
28 मई से पहले का पूरा फुटेज डिलीट
जब जांच टीम ने सीसीटीवी कैमरों की जांच की तो एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। थाना परिसर के मुख्य कैमरे का 28 मई से पहले का पूरा फुटेज डिलीट कर दिया गया था, मानो सबूतों को मिटाकर सच को दफनाने की कोशिश की गई हो। जांच रिपोर्ट में घोर लापरवाही और संदिग्ध आचरण पाए जाने पर प्रतापगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
चार पुलिसकर्मियों को किया गया गिरफ्तार
वहीं सोमवार रात चौकीदार राहुल कुमार, अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और चालक अखिलेश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और चोरी की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
नशे के कारोबारियों तक पहुंचाया जा रहा था कफ सिरप बोतल
पूछताछ में चौकीदार राहुल कुमार ने जो कहानी बताई, उसने पूरे मामले की परतें खोल दीं। राहुल ने स्वीकार किया कि त्रिवेणीगंज निवासी आशीष के संपर्क में आने के बाद उसने साथियों के साथ मिलकर मालखाने से कफ सिरप निकालकर बेचना शुरू किया। थानाध्यक्ष के छुट्टी के दौरान रात के अंधेरे में माल निकाला जाता और नशे के कारोबारियों तक पहुंचाया जाता था। जब मामला खुलने लगा तो गायब माल की भरपाई के लिए दूसरी कंपनी और अलग बैच नंबर वाली 2842 बोतलें मालखाने में रख दी गईं, ताकि कोई शक न करे। लेकिन सच ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सका और जांच में पूरा खेल उजागर हो गया। राहुल ने यह भी कबूल किया कि इससे पहले भी थाने में जब्त देसी शराब, कफ सिरप, बाइक के पार्ट्स और टोटो की बैटरियां चोरी कर बेची जाती थीं। इन सबकी कमाई चारों आरोपी आपस में बांट लेते थे।
अब सवाल यह है कि क्या इस पूरे खेल में सिर्फ चार पुलिसकर्मी ही शामिल थे या कहानी के किरदार और भी हैं? सुपौल के प्रतापगंज थाना से निकली यह कहानी सिर्फ चोरी की नहीं, बल्कि उस भरोसे के टूटने की कहानी है, जो जनता पुलिस पर करती है। जब कानून के रखवाले ही कानून को बेचने लगें, तो फिर सवाल सिर्फ एक थाने का नहीं, पूरे सिस्टम का खड़ा हो जाता है।
(सौपाल से संत सरोज की रिपोर्ट)
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