
दूसरा कारण - एफडी की राशि का करयोग्य होना जो आपकी शुद्ध कमाई को और घटा देता है।
लंबे समय के लिए निवेश किए जाने वाले विकल्पों मसलन इक्विटी, म्युचुअल फंड में रिटर्न करमुक्त होता है। जबकि एफडी में मिलने वाला ब्याज मौजूदा स्लैब में ही कर योग्य होता है। इस तरह एफडी के रिटर्न से मिलने वाली आपकी आय जितनी ज्यादा होगी एफडी से मिलने वाला रिटर्न उसी अनुपात में कम होता जाएगा।
ऐसे में किसी भी निवेशक को निवेश के लिए ऐसे विकल्प चुनने चाहिए जो लंबे समय में महंगाई की दर से ज्यादा रिटर्न देने में सक्षम हों साथ ही निवेशित पूंजी पर लंबे समय में निवेशक को अच्छे रिटर्न मुहैया करा सके। ऐसे में बाजार के ज्यादातर जानकार निवेशक को म्युचुअल फंड, डेट फंड, इक्विटी फंड आदि में निवेश करने की सलाह देते हैं।
ध्यान रहे निवेशक की उम्र के लिहाज से भी कई बार निवेश सलाहकार निवेश की जाने वाली कुल राशि का आवंटन करते हैं। तमाम निवेश विकल्पों में आवंटन से जहां एक ओर निवेशक का जोखिम कम हो जाता है वहीं दूसरी ओर अच्छे रिटर्न मिलने की उम्मीद भी बढ़ जाती है।