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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन पर दिल्ली में पहरा! 26 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, 45 मेट्रो स्टेशन बंद

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Oct 09, 2026 10:48 pm IST,  Updated : Oct 09, 2026 11:52 pm IST

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। 26 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, 45 मेट्रो स्टेशन बंद करने की योजना और जंतर-मंतर के आसपास प्रतिबंधों से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

CJP के प्रदर्शन से पहले...- India TV Hindi
CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। Image Source : PTI

Highlights

  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद भी CJP ने आंदोलन करने का ऐलान किया।
  • दिल्ली में 26 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, 37 जगहों पर बैरिकेडिंग की गई।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा तैयारियों पर रोक नहीं लगाई, लेकिन आम लोगों को परेशानी से बचाने को कहा।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी यानी कि CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, लेकिन पार्टी के सदस्यों ने बिना अनुमति आंदोलन करने की बात कही है। इसके बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। 26 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। सेंट्रल दिल्ली में एक हजार से ज्यादा नए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और 37 जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है।

जंतर-मंतर के आसपास धारा 163 लागू

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत इलाके में भीड़ जुटाने और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है। दिल्ली पुलिस मुख्यालय में शुक्रवार को तीन घंटे तक बैठक हुई। इसके बाद जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे में शुक्रवार रात 9 बजे से शनिवार रात 10 बजे तक इंटरनेट सेवा बंद करने का फैसला लिया गया है। दिल्ली के बॉर्डर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

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Image Source : PTIदिल्ली के चिल्ला बॉर्डर पर नए कंक्रीट बैरियर लगाए जाने से यातायात धीमा हुआ।

दिल्ली आने वाली गाड़ियों की जांच, मेट्रो पर भी असर

दिल्ली के सभी बॉर्डर पर राज्य पुलिस के साथ सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान भी तैनात किए गए हैं। बाहर से आने वाली गाड़ियों की जांच की जा रही है। जंतर-मंतर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाकर आवाजाही रोकी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत शनिवार को दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशन बंद रखने की योजना बताई गई है। दिल्ली आने-जाने वाली कई ट्रेनों को भी रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई है। इन व्यवस्थाओं से आम यात्रियों को परेशानी होने की आशंका है।

दिल्ली पुलिस ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर एडवाइजरी जारी की है। जॉइंट पुलिस कमिश्नर नूपुर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि इलाके में धारा 163 लागू है और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियमों का पालन करने की चेतावनी दी है।

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Image Source : PTICJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते सुरक्षाकर्मी।

'प्रदर्शन भी होगा, इस्तीफा भी लिया जाएगा'

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य अभिजीत दीपके प्रदर्शन करने की जिद पर अड़े हैं। उन्होंने देशभर के समर्थकों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है। दीपके ने कहा कि इस बार लड़ाई आर-पार की है। उन्होंने दावा किया कि चाहे कुछ भी हो जाए, प्रदर्शन जरूर होगा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था का मामला

CJP के प्रदर्शन से जुड़ा मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। याचिका में दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने-जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की सुरक्षा तैयारियों पर रोक नहीं लगाई। अदालत ने कहा कि जरूरत के मुताबिक सख्ती की जा सकती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाए कि आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो।

इमाम उमेर इलियासी की मुस्लिम युवाओं से अपील

पिछली बार CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन को कई मुस्लिम संगठनों का समर्थन मिला था। हालांकि, इस बार कुछ मुस्लिम धर्मगुरु युवाओं से आंदोलन से दूर रहने की अपील कर रहे हैं। इमाम उमेर इलियासी ने कहा कि मुस्लिम युवाओं को प्रदर्शन में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को वहां जाने से रोकें। साथ ही उन्होंने मौलानाओं से भी सामने आकर युवाओं को जंतर-मंतर जाने से रोकने की अपील की।

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Image Source : PTIसंसद मार्ग थाने के पास प्रदर्शन से पहले CCTV कैमरे लगाकर निगरानी व्यवस्था मजबूत करता तकनीशियन।

7 दिनों में 27 FIR, पुलिसकर्मियों पर हमलों की जांच

दिल्ली पुलिस ने हाल के प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। पुलिस के मुताबिक, पिछले सात दिनों में 27 FIR दर्ज की गई हैं। इनमें राहुल गांधी के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं भी शामिल हैं। पुलिस इन मामलों में प्रदर्शनकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।

किन धाराओं में दर्ज हुए मामले?

  1. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 27 में से 22 FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) लगाई गई है। यह धारा एक ही साझा इरादे से कई लोगों द्वारा किए गए अपराध से जुड़ी है। इसके अलावा, 18 मामलों में धारा 223(a) जोड़ी गई है, जो सरकारी आदेश की अवहेलना से संबंधित है।
  2. धारा 221 को 17 मामलों में लगाया गया है। यह सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने से जुड़ी है। वहीं, धारा 132 भी 17 मामलों में शामिल की गई है। यह ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी पर हमला करने या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित है।
  3. पुलिस ने 9 मामलों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी धारा भी लगाई है। कुछ FIR में सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने, जानबूझकर चोट पहुंचाने और बंधक बनाने जैसे आरोपों से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस का कहना है कि इन मामलों की जांच जारी है।

पिछली बार 17 दिन तक चला था प्रदर्शन

दिल्ली पुलिस की सख्ती के पीछे पिछली बार का अनुभव भी एक वजह बताया जा रहा है। पुलिस ने पहले CJP को एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति दी थी, लेकिन धरना 17 दिन तक चला था। इस बार पुलिस का मानना है कि मामला छात्रों से जुड़े मुद्दे के बजाय राजनीतिक है। पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन में राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम हो सकती है।

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Image Source : PTICJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले जनपथ मेट्रो स्टेशन के पास कई स्तरों पर बैरिकेडिंग के पीछे तैनात सुरक्षाकर्मी।

पुलिस को क्यों है बड़े जमावड़े की आशंका?

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों से ऐसी जानकारी मिली है कि प्रदर्शनकारी सेंट्रल दिल्ली में बड़े पैमाने पर जुटकर सामान्य गतिविधियों को बाधित करने और पुलिस को उकसाने की कोशिश कर सकते हैं। इंटरनेट के जरिए माहौल बनाने की आशंका भी जताई गई है। इसी वजह से प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगहों पर रोकने की तैयारी की गई है। पुलिस ने यह भी कहा है कि पिछली बार प्रदर्शन में ऐसे लोग पहुंचे थे, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड था। पुलिस का आरोप है कि कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। इस बार ऐसे लोगों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने की तैयारी की जा रही है।

सुरक्षा इंतजामों के बीच आम लोगों की बढ़ सकती है परेशानी

इस पूरे मामले में आम लोगों की परेशानी भी बड़ा मुद्दा है। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के कारण ट्रेनों के रद्द होने, मेट्रो स्टेशन बंद रहने, सड़कों पर बैरिकेडिंग और इंटरनेट बंद होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है। जिन लोगों का प्रदर्शन या राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें भी काम पर जाने और अपने गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कत हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आम लोगों की सुविधा का ध्यान रखने पर जोर दिया है।

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