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कांकेर जिले में कई गांवों के सरपंचों ने दिया इस्तीफा, अंतागढ़ के गोल्डन चौक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : May 20, 2026 11:48 pm IST,  Updated : May 20, 2026 11:54 pm IST

कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक की 27 ग्राम पंचायतों के मुखियाओं ने बुधवार को यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया कि उनके इलाकों में विकास कार्यों को मंज़ूरी नहीं दी गई है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : MAGNIFIC

कांकेरः छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के 27 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने इस्तीफा दे दिया। सरपंचों का आरोप है कि उनके इलाके में विकास कार्य मंजूर नहीं किए जा रहे हैं। स्थानीय पंचायत सदस्य संघ ने हालांकि दावा किया कि विकासखंड के सभी 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों और एक जिला पंचायत सदस्य ने विरोध स्वरूप अपना इस्तीफा दिया है। अंतागढ़ क्षेत्र के अतिरिक्त कलेक्टर ने पुष्टि की कि 27 सरपंचों ने अपने इस्तीफे अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) को सौंप दिए हैं। 

अंतागढ़ के गोल्डन चौक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

ये सरपंच 18 मई से अंतागढ़ के गोल्डन चौक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं और ग्रामीण विकास कार्यों की मंज़ूरी और फंड जारी करने की मांग कर रहे हैं। चुने हुए ग्राम मुखियाओं (सरपंच) ने आरोप लगाया कि प्रशासन पिछले एक साल में उनकी पंचायतों में एक भी विकास परियोजना को मंज़ूरी देने में नाकाम रहा है, जिससे वे ग्रामीणों से किए गए वादों को पूरा करने में असमर्थ हो गए हैं।
 
सरपंचों ने सुनाई पीड़ा

अंतागढ़ इलाके से कांकेर जिला पंचायत के सदस्य गुप्तेश उसेंडी ने कहा, ''ग्रामीण हमसे पूछते हैं कि हमने अपने कार्यकाल के दौरान कौन से विकास कार्य किए हैं, लेकिन हमारे पास कोई जवाब नहीं होता। धन और कार्यों की मंजूरी के बिना, हम पंचायतों को चलाने में पूरी तरह से असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य लगभग ठप पड़े हैं, जिसकी वजह से सामूहिक इस्तीफे का यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा, ''जब कोई काम ही नहीं है, तो पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है। लोगों ने हमें उम्मीदों के साथ चुना था और अब विकास कार्यों की कमी को लेकर हमसे सवाल करते हैं। प्रखंड के सभी 56 सरपंचों और मैंने इस्तीफा सौंप दिया है।

लमकानहार ग्राम पंचायत की सरपंच मंजू लता गावड़े ने कहा कि सरपंचों ने पिछले साल भी विरोध प्रदर्शन किया था और तब प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि 15 दिनों के भीतर कार्यों को मंजूरी दे दी जाएगी, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, ''कई महीने बीत चुके हैं, फिर भी कोई विकास कार्य शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण काम न होने के लिए हमें दोषी ठहराते हैं, लेकिन धन के बिना हम विकास कार्य कैसे कर सकते हैं? कलगांव ग्राम पंचायत की सरपंच प्रमिला नाग ने कहा कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण सरपंच 'बेबस' थे और इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो गए। उन्होंने आरोप लगाया, ''इलाकों में बिजली, पानी या सड़कें नहीं हैं। बारिश के दौरान आंगनवाड़ी केंद्र में जलजमाव होता है। बार-बार प्रस्ताव भेजने के बाद भी कोई राशि जारी नहीं की गई।

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