Monday, March 09, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. छत्तीसगढ़
  3. सरकारी स्कूल में शिक्षक अब कुत्तों की करेंगे निगरानी, बच्चों की पढ़ाई के साथ दी गई नई जिम्मेदारी

सरकारी स्कूल में शिक्षक अब कुत्तों की करेंगे निगरानी, बच्चों की पढ़ाई के साथ दी गई नई जिम्मेदारी

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1 Published : Nov 22, 2025 11:35 pm IST, Updated : Nov 22, 2025 11:35 pm IST

शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी एक आदेश के मुताबिक शिक्षकों और प्राचार्यों को 'डॉग वॉचर' (Dog Watcher) की भूमिका निभानी होगी।

Dog- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK डॉग

रायपुर:  छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को एक अजीबोगरीब नई ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। इस नई जिम्मेदारी के तहत अब शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के साथ ही कुत्तों की निगरानी भी करनी होगी। उन्हें कुत्तों का बायोडाटा भी तैयार करना होगा। शिक्षा विभाग के इस आदेश से शिक्षकों में नाराजगी है।  शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी एक आदेश के मुताबिक  शिक्षकों और प्राचार्यों को 'डॉग वॉचर' (Dog Watcher) की भूमिका निभानी होगी। उन्हें एक विशेष प्रपत्र में कुत्तों का विस्तृत बायोडाटा तैयार करना होगा। इस प्रपत्र में उन्हें कुत्तों के रंग, लिंग (नर/मादा), स्वभाव (शांत/हिंसक), पहचान के निशान, और वे किस समय स्कूल में देखे गए, जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भरनी होंगी।

Related Stories

क्यों उठाया ये कदम?

शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों को सौंपी गई इस जिम्मेदारी को लेकर यह तर्क दिया जा रहा है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। वहीं प्रदेश के शिक्षा मंत्री इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी हवाला दे रहे हैं।  शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्ते हिंसक हो रहे हैं और बच्चों को काट रहे हैं। इसलिए यह कदम उठाया गया है।

दरअसल पिछले दिनों बलौदाबाजार में एक आवारा कुत्ते द्वारा बच्चों का मध्यान्ह भोजन जूठा करने का मामला सामने आया था। इसी वजह से बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने शिक्षकों को यह काम भी सौंप दिया है। शिक्षकों द्वारा कुत्तों के संबंध तैयार किया गया डेटा नगरीय निकाय या ग्राम पंचायत की 'डॉग कैचर टीम' से शेयर किया जाएगा। यह टीम कुत्तों को पकड़ने के लिए तत्काल एक्शन लेगी।

शिक्षक संघ ने बताया अव्यावहारिक और खतरनाक

शिक्षक संघ ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया है और इसे अव्यावहारिक बताया है। उनकी प्रमुख चिंताएँ ये हैं:

  1. जीवन का जोखिम: एक आवारा और हिंसक कुत्ते के पास जाकर उसका लिंग या स्वभाव पता करना शिक्षक के लिए जानलेवा हो सकता है।
  2. कार्य का बोझ: शिक्षकों पर पहले से ही बहुत सारे गैर-शैक्षणिक कार्य का बोझ है। इस नए काम से बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होगा।
  3. पहचान की मुश्किल: कुत्ते झुंड में आते हैं, स्थिर नहीं रहते, और पालतू/आवारा कुत्ते का अंतर करना मुश्किल है।
Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। छत्तीसगढ़ से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement