छत्तीसगढ़: पुलिस ने विजयवाड़ा, कृष्णा ज़िले और काकीनाडा में व्यापक तलाशी के दौरान छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ माओवादी नेताओं समेत 31 माओवादियों को गिरफ्तार किया। एलुरु में भी 15 माओवादियों की छिपे होने की ख़बर के बाद वहाँ भी संधिग्दों को पकड़ा गया है। कई माओवादियों ने पुलिस की गिरफ़्तारी से बचने के लिए मज़दूरों का भेष धारण किया था। यह अभियान आंध्र-ओडिशा सीमा पर तेज़ हुई माओवादी विरोधी कार्रवाई से जुड़ा है।
माओवादियों की मौजूदगी पता चलते ही मचा हड़कंप
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा और आसपास के इलाकों में माओवादियों की मौजूदगी से मंगलवार को हड़कंप मच गया, जब पुलिस ने छत्तीसगढ़ के कुछ शीर्ष नेताओं सहित 31 नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया।
विजयवाड़ा के कनुरू इलाके में न्यू ऑटोनगर की एक चार मंजिला इमारत से 27 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार माओवादियों में ज़्यादातर महिलाएँ थीं, जिन्होंने कथित तौर पर मज़दूरों के वेश में शरण ली थी।
पुलिस ने चलाया था तलाशी अभियान
शहर में माओवादियों के छिपे होने की खुफिया सूचना के बाद सुरक्षाकर्मियों ने तलाशी अभियान चलाया। अतिरिक्त महानिदेशक (खुफिया) महेश चंद्र लड्ढा ने बताया कि कृष्णा जिले, विजयवाड़ा और काकीनाडा से कुल 31 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया। चूंकि विजयवाड़ा और उसके आसपास, विशेषकर ऑटोनगर में, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक विभिन्न कारखानों और लकड़ी के डिपो में कार्यरत हैं, इसलिए माओवादियों ने संदेह से बचने के लिए शरण ले ली थी।
पत्नी सहित मारा गया था हिडमा
माओवादियों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सुरक्षाकर्मियों ने कोई हथियार या विस्फोटक बरामद किया है या नहीं। बताया जा रहा है कि यह तलाशी मंगलवार को आंध्र-ओडिशा सीमा क्षेत्र में अल्लूरी सीतारामाराजू जिले के जंगलों में सुरक्षा बलों द्वारा किए गए अभियान से जुड़ी है, जिसमें शीर्ष कमांडर और भाकपा (माओवादी) केंद्रीय समिति के सदस्य हिडमा और उसकी पत्नी राजी समेत छह माओवादी मारे गए थे।
जांच और तलाशी अभियान है जारी
छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा तेज़ किए गए अभियानों के दबाव में, माना जा रहा है कि उस राज्य से कई माओवादी आंध्र प्रदेश में घुस आए हैं। एडीजी इंटेलिजेंस ने कहा कि वे पिछले एक महीने से माओवादियों की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रख रहे थे। कुछ माओवादियों और उनके समर्थकों के आंध्र प्रदेश के अंदरूनी इलाकों में चले जाने का संदेह था।
पुलिस ऑटोनगर स्थित इमारत के मालिक से पूछताछ कर रही थी और उन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही थी जिन्होंने माओवादियों और उनके समर्थकों को शरण दी थी। इस बात की भी जांच की जा रही थी कि क्या वे किसी हमले की योजना बना रहे थे।