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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए हटानी होगी 100 साल पुरानी मस्जिद? केंद्र की दलील पर दिल्ली HC ने उठाए सवाल

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: India TV Delhi Bureau Desk
 Published : Nov 03, 2026 04:53 pm IST,  Updated : Nov 03, 2026 04:53 pm IST

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन परिसर में बनी कदीमी मस्जिद हटाने की जरूरत पर केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने सरकारी परिसरों में धार्मिक स्थल के नियमों और वैकल्पिक जगह की व्यवस्था पर सवाल पूछे। मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

Krishi Bhawan Kadimi Mosque case- India TV Hindi
सरकारी परिसर में धार्मिक स्थलों से जुड़े नियम Image Source : DELHIHIGHCOURT.NIC.IN

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन परिसर में बनी करीब 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाया जाना जरूरी है। सरकार का कहना है कि कृषि भवन और केंद्रीय सचिवालय सरकारी कामकाज के लिए बने परिसर हैं। यहां किसी स्थायी धार्मिक ढांचे को बनाए रखना सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ है।

हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछे धार्मिक स्थलों पर नियम

सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अनिश दयाल ने केंद्र सरकार के इस रुख पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकारी परिसरों में किसी भी धर्म के पूजा स्थल बनाने या बनाए रखने पर रोक लगाने वाले कोई नियम हैं? कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि अगर किसी धार्मिक स्थल को हटाया जाता है तो उसके लिए दूसरी जगह देने को लेकर क्या नियम हैं।

सरकारी जमीन पर दूसरी जगह देने की बाध्यता से इनकार

केंद्र सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि कृषि भवन और शास्त्री भवन की जगह कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) की नई बिल्डिंग बनाई जानी हैं।यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है और इसके लिए मस्जिद को हटाना जरूरी है। सरकार ने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी धार्मिक स्थल के लिए स्थायी रूप से जगह आरक्षित नहीं की जा सकती। साथ ही, सरकार को मस्जिद के लिए कृषि भवन या केंद्रीय सचिवालय परिसर में दूसरी जगह देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

मस्जिद कमेटी ने सितंबर में दाखिल की याचिका

सुनवाई के दौरान जस्टिस अनिश दयाल ने कहा कि सरकार के इस बयान का मतलब और उसका असर समझना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि यह जानना होगा कि क्या सरकारी परिसरों में किसी भी समुदाय के लिए प्रार्थना की जगह नहीं हो सकती। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बारे में नियमों और कानूनी स्थिति को साफ करने को कहा। कदीमी मस्जिद की देखरेख करने वाली कमेटी ने सितंबर में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कमेटी को आशंका थी कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत मस्जिद को गिराया जा सकता है।

आजादी के बाद से कर्मचारी पढ़ते रहे हैं नमाज

कमेटी ने कोर्ट से मांग की है कि CPWD और NDMC को मस्जिद गिराने या हटाने से रोका जाए। साथ ही, अगर नई बिल्डिंग के निर्माण के कारण मस्जिद को मौजूदा जगह पर रखना संभव नहीं है तो उसके आसपास ही नमाज पढ़ने के लिए उचित और पर्याप्त जगह दी जाए। कमेटी का कहना है कि आजादी के बाद से ही कृषि भवन और आसपास के सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी इस मस्जिद में नमाज पढ़ते रहे हैं। 

केंद्र ने दूसरी मस्जिद का दिया हवाला

केंद्र सरकार ने दलील दी कि इंडिया गेट के पास शाही मस्जिद जाब्ता गंज मौजूद है, जो कृषि भवन से करीब दो किलोमीटर के दायरे में है। सरकार के मुताबिक, यह मस्जिद आसपास नमाज पढ़ने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए उपलब्ध है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी को सरकार के जवाब पर अपनी बात रखने के लिए समय दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

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