दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनाकारियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग तक खूब बवाल हुआ था, आंसू गैस के गोले चले थे, लाठीचार्च हुआ था, पथराव हुआ था। ऐसे में आज दिल्ली पुलिस कल से भी ज्यादा अलर्ट मोड पर है। इसके साथ ही पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान उपद्रव मचाने वालों के खिलाफ एक्शन लेना भी शुरू कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को CJP प्रोटेस्ट के बाद FIR दर्ज की है। आइए जानते हैं कि ये FIR में किन धाराओं में दर्ज हुई है।
किन धाराओं में हुई FIR?
सामने आई जानकारी के अनुसार, दिल्ली प्रदर्शन के मामले में थाना पार्लियामेंट स्ट्रीट में FIR दर्ज की गई है। यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS), 2023, आर्म्स एक्ट, 1959 तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम (Prevention of Damage to Public Property Act- PDPP Act) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
- धारा 223(बी) BNS- लोक सेवक द्वारा विधिसम्मत आदेश की अवज्ञा या सरकारी कार्य में बाधा से संबंधित प्रावधान
- धारा 221 BNS- लोक सेवक के कार्य में बाधा डालना या उसे प्रभावित करना
- धारा 132 BNS- लोक सेवक पर हमला करना या बल का प्रयोग करना
- धारा 121(1) BNS- गैरकानूनी जमावड़े या हिंसक भीड़ से संबंधित अपराध
- धारा 189(3), 190, 191(2), 191(3), 192 BNS- दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, हिंसा
- धारा 324(5) BNS- सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने या गंभीर नुकसान पहुंचाने से संबंधित प्रावधान
- धारा 109(1) BNS- हत्या के प्रयास या गंभीर हिंसक कृत्य से संबंधित प्रावधान (यदि परिस्थितियाँ लागू हों)
- धारा 125 BNS- मानव जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्य
- धारा 3(5) BNS- समान उद्देश्य या साझा मंशा के तहत सामूहिक रूप से अपराध करना
- धारा 61(2) BNS- आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) से संबंधित प्रावधान
- आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25(1AB)
- पीडीपीपी एक्ट (Prevention of Damage to Public Property Act) की धारा 3- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, तोड़फोड़ करने या क्षति पहुंचाने का अपराध
क्या हैं आरोप?
संक्षेप में बताए तो, इस एफआईआर में आरोप है कि आरोपितों ने गैरकानूनी तरीके से एकत्र होकर सार्वजनिक व्यवस्था भंग की, सरकारी कार्य में बाधा डाली, हिंसक गतिविधियों में शामिल हुए, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया इन सभी आरोपों की जांच थाना पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और पीडीपीपी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार की जा रही है।
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