NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान दलित युवक संजय पर हुए हमले को लेकर सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सौरव ने आरोप लगाया कि हमले में संजय के सिर पर इतनी गंभीर चोट आई थी कि उनका सिर फट गया था। घाव इतना गहरा था कि FIR में 'हत्या की कोशिश' (IPC की धारा 307) लगाई जाना जरूरी था। लेकिन पुलिस ने यह धारा जोड़ने से इनकार कर दिया।
वहीं, अब दिल्ली पुलिस ने 23 जून 2026 को CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट और संजय कुमार को लगी चोट को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों का फैक्ट चेक जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान 38 वर्षीय संजय कुमार के सिर पर चोट लगी थी। यह चोट झड़प के दौरान एक व्यक्ति द्वारा पहने गए कड़े से लगी।
‘खोपड़ी में दरार’ के दावे को पुलिस ने नकारा
दिल्ली पुलिस के अनुसार, संजय का राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में मेडिकल जांच कराई गई थी। डॉक्टरों की मेडिकल राय में चोटों को साधारण प्रकृति का बताया गया। पुलिस ने साफ किया कि चोट किसी हथियार से नहीं, बल्कि कड़े से लगी थी। दिल्ली पुलिस ने संजय की खोपड़ी फटने से संबंधित दावों को तथ्यों और MLC के अनुरूप नहीं बताया है। पुलिस के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में इस तरह की चोट का समर्थन नहीं मिलता। ऐसे में सोशल मीडिया पर संजय का सिर फटने या खपड़ी में दरार आने को लेकर वायरल की जा रही जानकारी को पुलिस ने पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
पुलिस बोली- किसी तरह का दबाव या हस्तक्षेप नहीं
पुलिस ने बताया कि संजय कुमार के बयान के आधार पर संसद मार्ग थाने में BNS की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। घटना के बाद संबंधित लोगों को मौके से हिरासत में लिया गया था। जांच के दौरान सूरज कुमार, उम्र 24 वर्ष, और स्वतंत्र भारद्वाज, उम्र 21 वर्ष, को कानून के अनुसार नोटिस जारी किए गए और उनसे पूछताछ की गई। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह के अनुचित प्रभाव या दखल का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत और बेबुनियाद है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि पूरे मामले को कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार सख्ती से निपटाया गया है।
सौरव दास ने क्या आरोप लगाए?
इस मामले को लेकर सौरव दास ने अपने X अकाउंट पर लंबा बयान जारी किया है। सौरव दास ने लिखा है, मैं आपको बताता हूँ कि जंतर-मंतर पर हमारे विरोध प्रदर्शन के दौरान दलित व्यक्ति संजय पर BJP के संरक्षण वाले गुंडे स्वतंत्र भारद्वाज के हमले के बाद असल में क्या हुआ-
- संजय जी का सिर फट गया था। घाव इतना गहरा था कि FIR में 'हत्या की कोशिश' (IPC की धारा 307) का आरोप लगाया जाना ज़रूरी था।
- पुलिस ने यह धारा जोड़ने से इनकार कर दिया।
- इस धारा के तहत तुरंत गिरफ़्तारी हो सकती थी क्योंकि यह एक संज्ञेय और गैर-ज़मानती अपराध है।
- इस गिरफ़्तारी से बचने के लिए, पुलिस ने साफ़ तौर पर यह धारा जोड़ने से मना कर दिया।
- हमने कहा कि कम से कम 'गंभीर चोट' (धारा 326) वाली धारा तो जोड़ी जाए, जिससे भी तुरंत गिरफ़्तारी हो सकती थी।
- DCP सचिन शर्मा और ACP अजय शर्मा ने साफ़ इनकार कर दिया।
- इतना ही नहीं, उन्होंने हमारे मुँह पर कहा कि "जाओ कोर्ट से आदेश ले आओ"!
- हमें अभी तक मेडिकल एक्सपर्ट की राय नहीं मिली है।
- भारद्वाज के साथ शामिल गिरोह के अन्य सदस्यों की भी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है, जबकि उनमें से कई ने हमले के तुरंत बाद रील्स बनाईं और संजय की नाबालिग बेटी निशु को खुलेआम धमकी दी।
- अब भारद्वाज खुलेआम डींगें मार रहा है कि दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा पुलिस पर दबाव डाल रहे हैं ताकि उसे पुलिस स्टेशन से छोड़ा जा सके और कोई ऐसी सख्त धारा न लगाई जाए जिससे उसकी गिरफ्तारी हो सके!
सीजेपी प्रवक्ता ने आगे लिखा है, ''तो हमें बताइए कि मिश्रा को FIR में सह-आरोपी क्यों नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने न्याय की प्रक्रिया में गैर-कानूनी दखल दिया? गिरोह के सदस्यों को बचाने और अपने पद का दुरुपयोग करने के लिए उन्हें इस्तीफा क्यों नहीं देना चाहिए? क्या BJP का नेतृत्व इसका समर्थन करता है?''
वहीं, आपको बता दें कि CJP का 5 सितंबर का प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के इस कदम की प्रशंसा की है।
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