नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने एक शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है जो अपने आप को अपर जिलाधिकारी (ADM) बताकर सरकारी नौकरी दिलाने और जमीन आवंटित करवाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपए ऐंठ रहा था। इस आरोपी ने यूपी के एक असली सिविल सेवा अधिकारी (PCS) की डिजिटल पहचान और प्रोफाइल का इस्तेमाल कर लोगों से कुल मिलाकर 60 लाख रुपए की ठगी की। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। आइए जानते हैं क्या है पूरी खबर।
असली अधिकारी की तस्वीरें चुराकर बनाई फर्जी पहचान
दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपी की पहचान गांधी विहार, दिल्ली के रहने वाले पवन कुमार पांडे उर्फ वरुण कुमार पांडे (43) के रूप में हुई है। आरोपी ने साल 2015 बैच के असली पीसीएस अधिकारी वरुण कुमार पांडे जोकि झांसी में पूर्व अपर जिलाधिकारी के पद पर रह चुके हैं, का नाम और पद चुराया। क्योंकि असली अधिकारी की तस्वीरें और प्रशासनिक विवरण इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे, इसलिए आरोपी ने उसी पहचान को अपना लिया ताकि पीड़ितों के सामने खुद को अधिकारी साबित कर सके।
ऐसे फंसा नकली अधिकारी
इस फर्जी अधिकारी का भंडाफोड़ तब हुआ जब मार्च में सिधीपुरा पुलिस चौकी में एक शिकायत दर्ज कर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने खुद को ''उत्तर प्रदेश का एडीएम वरुण कुमार पांडे' बताया और उच्च अधिकारियों से संबंध होने का दावा किया। फर्जी एडीएम ने शिकायतकर्ता और उसके साथियों को एक सरकारी योजना के तहत नोएडा में प्राइम लोकेशन पर प्लॉट दिलाने और पक्की सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर किश्तों में 60 लाख रुपए हड़प लिए।
पुलिस के अनुसार इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने बताया कि आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन "वरुण कुमार पांडे" के नाम से पंजीकृत 'एप्पल आईडी' से जुड़े थे। असली वरुण कुमार पांडे (2015 बैच के पीसीएस अधिकारी और झांसी में पूर्व अपर जिलाधिकारी रह चुके हैं) से सत्यापन करने पर पता चला कि आरोपी ने धोखाधड़ी से उनके नाम और पद का इस्तेमाल किया। एक अधिकारी ने कहा, "आरोपी ने जान-बूझकर इन पीसीएस अधिकारी की पहचान अपनाई क्योंकि उनकी तस्वीरें और अन्य जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी। ऐसे में उसे खुद को सरकारी अधिकारी के तौर पर भरोसेमंद ढंग से पेश करने में मदद मिली।"
पूछताछ के दौरान, आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह कई सालों तक एडीएम बनकर रहा और अपने दावों को सही साबित करने के लिए नकली पहचान-पत्र और दस्तावेज इस्तेमाल करता रहा। उस पर सरकारी नौकरी दिलाने और जमीन आवंटित करने का वादा करके अन्य लोगों के साथ धोखाधड़ी करने का भी संदेह जताया जा रहा है। पुलिस ने उसके पास से एडीएम के पद वाले 'विज़िटिंग कार्ड' और पहचान पत्र, कथित तौर पर जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, सरकारी दस्तावेज़, मोबाइल फ़ोन, स्क्रीनशॉट, व्हाट्सअप चैट और तस्वीरें बरामद की हैं जिनका इस्तेमाल वह कथित तौर पर गलत पहचान के लिए करता था। पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए आगे कहा कि जांच अभी जारी है और कुछ और बड़े खुलासे भी इस केस में हो सकते हैं।
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