दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती करने का आदेश नहीं दिया गया है। दिल्ली शिक्षा निदेशालय इस बारे में पहले ही स्पष्टीकरण जारी कर चुका है। अब झूठी जानकारी फैलाने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई जा रही है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झूठी, गुमराह करने वाली और गलत जानकारी फैलाने का गंभीरता से संज्ञान लिया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टीचरों को आवारा कुत्तों की गिनती करने का निर्देश दिया गया था।
शिक्षा निदेशक ने साफ तौर पर कहा कि शिक्षा निदेशालय ने ऐसा कोई आदेश, निर्देश, सर्कुलर या पॉलिसी का फैसला कभी जारी नहीं किया है। फैलाए जा रहे दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत, बेबुनियाद और झूठे हैं, और इनका शिक्षा विभाग के किसी भी आधिकारिक फैसले या निर्देश से कोई लेना-देना नहीं है।
20 अक्टूबर के सर्कुलर से जुड़ा है मामला
शिक्षा निदेशालय की तरफ से यह साफ किया गया कि 20 अक्टूबर का एक सर्कुलर सिर्फ माननीय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के रिट पिटीशन (सिविल) नंबर 5 ऑफ़ 2025 के निर्देशों के पालन में जारी किया गया था, जिसका टाइटल था “शहर आवारा कुत्तों से परेशान, बच्चे कीमत चुका रहे हैं”। सर्कुलर का एकमात्र मकसद सिक्योरिटी स्टाफ की तैनाती और सही एक्सेस कंट्रोल उपायों के जरिए स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोककर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। डायरेक्टर ने जोर देकर कहा कि उस सर्कुलर में शिक्षकों द्वारा आवारा कुत्तों की गिनती करने का कोई जिक्र नहीं है। शिक्षकों की प्रोफेशनल गरिमा, एकेडमिक भूमिका और सम्मान सबसे ऊपर और अटूट है।
रील के जरिए गलत जानकारी फैला रहे लोग
डायरेक्टोरेट ने आगे बताया कि फर्जी कहानी के फैलने पर उसने 30 दिसंबर के एक प्रेस नोट के जरिए आधिकारिक तौर पर स्थिति साफ कर दी थी, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि शिक्षा निदेशालय ने ऐसा कोई निर्देश कभी जारी नहीं किया था। इस ऑफिशियल सफाई के बावजूद, गलत और गुमराह करने वाला कंटेंट जानबूझकर फैलाया और बढ़ाया जाता रहा, जो गलत इरादे और जनता को गुमराह करने की एक सोची-समझी कोशिश दिखाता है। डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया पर नकल करने के मामले भी देखे हैं, जिसमें लोग वीडियो और रील के जरिए खुद को गलत तरीके से टीचर बता रहे हैं और आवारा कुत्तों की गिनती कर रहे हैं। ऐसे काम गंभीर अपराध हैं।
पुलिस में दर्ज हुई शिकायत
शिक्षा निदेशालय ने सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट, नई दिल्ली में एक फॉर्मल शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें झूठी कहानी की शुरुआत, बनाने और उसे बढ़ाने की जांच की मांग की गई है। ऐसी गलत जानकारी फैलाने में शामिल सोशल मीडिया हैंडल की एक लिस्ट पुलिस के साथ शेयर की गई है। शिकायत में बताया गया है कि इन कामों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के तहत प्रावधान लागू होते हैं, जिसमें क्रिमिनल मानहानि, पब्लिक मिसचीफ, जालसाजी, नकल करना और गुमराह करने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंटेंट को पब्लिश या ट्रांसमिट करने से जुड़े अपराध शामिल हैं।
लोगों से की यह अपील
गलत जानकारी फैलाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, गलत कंटेंट बनाने और आगे भेजने वालों की पहचान कर पूरी जांच की मांग की गई है। इसके साथ ही सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की गई है। इसके साथ ही डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन मीडिया ऑर्गनाइजेशन और नागरिकों से अपील करते हुए निदेशालय ने कहा है कि कोई भी कंटेंट पब्लिश या शेयर करने से पहले, खासकर एजुकेशन और स्टूडेंट सेफ्टी से जुड़े सेंसिटिव मामलों पर, ऑफिशियल सोर्स से जानकारी वेरिफाई करें।
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