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IB ऑफिसर अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन की सजा पर 31 जुलाई को फैसला, दिल्ली पुलिस ने मांगी फांसी

 Reported By: Atul Bhatia Written By: Niraj Kumar
 Published : Jul 27, 2026 04:43 pm IST,  Updated : Jul 27, 2026 05:28 pm IST

पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन की सजा पर 31 जुलाई को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में फैसला सुनाया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन को फांसी दिए जाने की मांग की है।

ताहिर हुसैन- India TV Hindi
ताहिर हुसैन Image Source : PTI

नई दिल्ली: IB ऑफिसर अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन की सजा पर 31 जुलाई को फैसला सुनाएगी। दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन को फांसी दिए जाने की मांग की है। इससे पहले अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को अंकित शर्मा मर्डर केस में दोषी करार दिया था

फरवरी  2020 में दिल्ली दंगों के दौरान आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। उनका शव एक नाले से बरामद किया गया था। इस मामले में पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन और 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था।  कोर्ट ने 5 को दोषी करार दिया था जिसमें ताहिर हुसैन भी शामिल है। ताहिर के अलावा नजीम, काशिम, अनस और जावेद को भी कोर्ट ने दोषी करार दिया है।

जानवरों जैसी हरकत पर उतर आए थे आरोपी

दिल्ली पुलिस ने फांसी की मांग करते हुए कहा कि अंकित शर्मा पर लगातार हमला करते समय दोषी ''जानवरों जैसी हरकत पर उतर आए थे''। पांचों दोषियों की सजा को लेकर दलीलें एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह के सामने रखी गईं। विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत में कहा कि दोषियों ने शर्मा का अपहरण किया, बेरहमी से मारपीट की और उनकी हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि उनकी मौत के बाद भी वे उन पर वार करते रहे। 

जानवरों जैसी हरकत पर उतर आए थे। उन्होंने कहा, ''अंकित शर्मा का अपहरण किया गया और बेरहमी से पीटकर उनकी हत्या कर दी गई। उनके शरीर पर कुल 51 घाव पाए गए, जिनमें से 18 घाव धारदार हथियारों से किए गए थे। इस्तेमाल किए गए हथियारों से इस अपराध के पीछे की मंशा और अपराधियों की क्रूरता का पता चलता है। वे जानवरों जैसी हरकत पर उतर आए थे। शर्मा की मौत के बाद भी वे उन पर हमला करते रहे।'' 

11 आरोपियों में से 6 बरी

ताहिर हुसैन की ओर से पेश हुए वकील राजीव मोहन और तारा नरूला ने पुलिस के तर्क का विरोध किया और कहा कि उनके मुवक्किल की कोई खास भूमिका नहीं बताई गई है। उन्होंने कहा कि इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि 11 आरोपियों में से छह को इस मामले में बरी किया जा चुका है। वकील मोहन ने कहा, ''हर दोषी व्यक्ति को मौत की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए। पहले अपराध की गंभीरता बढ़ाने वाली परिस्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए और उसके बाद सज़ा कम करने वाली परिस्थितियों पर। दोषी ठहराए जाने के मामले में, 11 आरोपियों में से छह को बरी किया जा चुका है।'' 

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा के संबंध में फैसला 31 जुलाई तक सुरक्षित रख लिया। बता दें कि 13 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था।

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